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एसएससी में डिग्रीधारको की संख्या के आधार पर चयन प्रक्रिया का विवेचन

कई प्रतियोगी परीक्षाओं के बीच एसएससी की परीक्षाएं सबसे अधिक लोकप्रिय परीक्षाओं में से एक हैं. अलग– अलग परीक्षा आयोजक निकाय प्रत्येक वर्ष इसका आयोजन करती हैं.

Jan 4, 2017 16:13 IST
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Degreeholders in SSC
Degreeholders in SSC

कई प्रतियोगी परीक्षाओं के बीच SSC की परीक्षाएं सबसे अधिक लोकप्रिय परीक्षाओं में से एक हैं. अलग– अलग परीक्षा आयोजक निकाय प्रत्येक वर्ष इसका आयोजन करती हैं. इन परीक्षाओं में लाखों उम्मीदवार शामिल होते हैं और प्रतिष्ठित नौकरी के लिए सिर्फ कुछ ही उम्मीदवार सफल हो पाते हैं. इस लेख में छात्रों द्वारा अपनाए जाने वाले आदर्श रणनीति और उससे संबंधित विभिन्न मुद्दों जैसे छात्रों की पृष्ठभूमि, उनका अकादमिक प्रोफाइल आदि की व्याख्या करने की कोशिश करेंगें|

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यहां हम छात्रों के शैक्षणिक पृष्ठभूमि और प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता की दर से इसके संबंध पर चर्चा करेंगे.

SSC परीक्षा : उम्मीदवार के प्रोफाइल से संबंध

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कई प्रकार के उम्मीदवार SSC की परीक्षाएं जैसे SSC सीजीएल, सीएचएसएल, जूनियर इंजीनियर एग्जामिनेशन आदि देते हैं. इनमें से ज्यादातर परीक्षाओँ के लिए आपका ग्रैजुएट या हायर सेकेंडरी डिग्रीधारी होना चाहिए. इनमें इंजीनियरों, सांख्यिकीय अन्वेशकों (स्टैटिस्टिकल इन्वेस्टिगेटर्स) और अन्य पदों जैसे अपवाद वाले विशेषज्ञ पद भी हैं. आईए देखते हैं कि सामान्य SSC परीक्षाओं जैसे सीजीएल, सीएचएसएल आदि में क्या है जो सफलता की दर को निर्धारित करता है.

  • अकादमिक प्रोफाइल : SSC परीक्षाओं की सफलता में इसका बहुत महत्व है. ज्यादातर SSC परीक्षाएं गणित, रीजनिंग और अंग्रेजी पर आधारित होती हैं. इसी कारण इंजीनियरिंग  छात्रों को इन परीक्षाओं में अक्सर दूसरों से बढ़त मिल जाती है. हालांकि, ज्यादातर परीक्षाओं में सामान्य जागरूकता जैसे विषय भी होते हैं और कला विषय के छात्रों को पढ़ने की आदत के कारण इस खंड में दूसरों के मुकाबले अक्सर बढ़त मिलती है|

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  • तैयारी की रणनीति : इंजीनियरिंग के ज्यादातर छात्र SSC की परीक्षाओं में गणित और रीजनिंग (तर्कशास्त्र) में काफी अच्छे होते हैं. दूसरी तरफ वे अक्सर अंग्रेजी और सामान्य जागरूकता खंडों में बहुत अच्छे नहीं होते. लेकिन ये दो खंड बेहद अनिश्चित प्रकार के खंड होते हैं और अंग्रेजी में दक्ष छात्र भी अक्सर SSC द्वारा पूछे जाने वाले सवालों से भ्रमित हो जाते हैं. इसलिए इन परीक्षाओं में सफलता की कुंजी रीजनिंग और गणित के पास होती है.
  • परीक्षा में प्रयास : SSC की परीक्षाओं में यदि आप सूत्रों और नियमों की अच्छी जानकारी रखते हैं तो गणित और रीजनिंग का खंड बहुत हद तक स्पष्ट होता है. अंग्रेजी और सामान्य ज्ञान का खंड ऐसा नहीं होता क्योंकि इन खंडों का सिलेबस और इनसे जुड़ी अनिश्चितताएं बहुत अधिक होती हैं और इनमें अधिक अंक लाना मुश्किल होता है. इसलिए, आपके अंक गणित और रीजनिंग खंड में प्राप्त किए गए अंक पर निर्भर करते हैं.
  • विश्लेषण क्षमता : इन परीक्षाओं के ज्यादातर छात्रों को परीक्षा के पैटर्न का अच्छी तरह से विश्लेषण करने की जरूरत है और इंजीनियरिंग के छात्र अक्सर ऐसा करने में अच्छे होते हैं. लेकिन यह भी सच है कि अन्य विषयों के छात्र अच्छे प्रेक्षक और विश्लेषक बन कर इसमें अधिक अंक प्राप्त कर सकते है|

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SSC की परीक्षाएं मुख्य रूप से गणित और रीजनिंग पर आधारित होती हैं क्योंकि अंग्रेजी के प्रश्न अक्सर बेहद भ्रामक होते हैं और इस खंड में दिए गए विकल्पों में से आप सही विकल्प के बारे में कभी भी निश्चित नहीं हो सकते. इसलिए इस परीक्षा में चुने जाने के लिए आपको गणित और रीजनिंग में जितना अधिक संभव हो सके अंक प्राप्त करने की जरूरत है. माना जाता है कि विज्ञान और इंजीनियरिंग के छात्र गणित और रीजनिंग में बहुत अच्छे होते हैं लेकिन दूसरे विषयों के छात्र कड़ी मेहनत और सतत अभ्यास से इनमें बहुत अच्छा कर सकते हैं. इसलिए कड़ी मेहनत के साथ तैयारी करें और अपना सर्वश्रेष्ठ दें. निश्चित रूप से सफलता आपके कदमों में होगी.

शुभकामनाएं!

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