भारत की पहली फ्लोटिंग प्रयोगशाला के बारे में 10 रोचक तथ्य
लोकतक झील भारत के उत्तर-पूर्व में सबसे बड़ी ताज़े पानी का झील है, और अब यह एक फ्लोटिंग प्रयोगशाला का घर है जो पानी में गश्त करते हुये प्रदूषण भार की विश्लेषण करेगा ताकि बायोम को बचाने या सुरक्षा प्रदान करने के लिए ठोस कदम उठाया जा सके। इस फ्लोटिंग प्रयोगशाला का उद्घाटन मणिपुर के वन और पर्यावरण मंत्री, थौनाओजम श्यामकुमार सिंह ने 24 फरवरी किया था।
लोकतक झील भारत के उत्तर-पूर्व में सबसे बड़ी ताज़े पानी का झील है, और अब यह एक फ्लोटिंग प्रयोगशाला का घर है जो पानी में गश्त करते हुये प्रदूषण भार की विश्लेषण करेगा ताकि बायोम को बचाने या सुरक्षा प्रदान करने के लिए ठोस कदम उठाया जा सके। इस फ्लोटिंग प्रयोगशाला का उद्घाटन मणिपुर के वन और पर्यावरण मंत्री, थौनाओजम श्यामकुमार सिंह ने 24 फरवरी किया था।
भारत की पहली फ्लोटिंग प्रयोगशाला के बारे में 10 रोचक तथ्य
1. जैव संसाधन और सतत प्रयोगशाला संस्थान (आईबीएसडी), इम्फाल ने भारत की पहली फ्लोटिंग प्रयोगशाला का निर्माण किया है जो पानी में तैरते हुये लोकतक झील की पर्यावरण प्रणाली का विश्लेषण कर सके ताकि झील के पानी की गुणवत्ता पर जरुरी कार्य किये जा सके।
2. लोकतक विकास प्राधिकरण (एलडीए) और जैव संसाधन और सतत प्रयोगशाला संस्थान (आईबीएसडी) का संयुक्त उद्गम है और इस फ्लोटिंग प्रयोगशाला को स्थापित करने में लगभग 15 लाख खर्च किया गया है।
3. इस फ्लोटिंग प्रयोगशाला को स्थापित करने में जैव संसाधन और सतत प्रयोगशाला संस्थान (आईबीएसडी) को चार महीने का वक़्त लगा।
4. यह फ्लोटिंग प्रयोगशाला 300 वर्ग किमी झील में तापमान, अम्लता, चालकता और भंग-ऑक्सीजन में परिवर्तन को रिकॉर्ड करेगा और जैव संसाधन और सतत प्रयोगशाला संस्थान (आईबीएसडी) इस डेटा की मदद से इस झील को संरक्षित करने में महत्वपूर्ण योगदान कर सके।
5. यह फ़्लोटिंग प्रयोगशाला सभी आधुनिक उपकरणों से लैस है जैसे पानी की गुणवत्ता विश्लेषक, जो स्वचालित रूप से तापमान, तापमान, अम्लता, लवणता और विद्युत चालकता मानकों की जांच करेगा है।
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6. इस फ़्लोटिंग प्रयोगशाला में पांच सदस्यीय महिला शोधकर्ता होंगी जो झील में गश्ती करते हुये सूक्ष्मजीवों के नमूने एकत्र करेंगी।
7. यह फ़्लोटिंग प्रयोगशाला मॉडल केद्रियें जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) द्वारा दी गयी है जिसका मुख्या कार्य पूर्वोत्तर राज्यों में जलीय प्रणाली के स्वास्थ्य की निगरानी करना है।
8. यह फ्लोटिंग प्रयोगशाला 15 मीटर लंबी नाव पर बनी है जो 10 लोगों को समायोजित कर सकती है।
9. यह फ्लोटिंग प्रयोगशाला का विश्लेषण उस झील की तैरती वनस्पति के लिए बहुत आवश्यक है जो 40 वर्ग किमी की गति से सिकुड़ता जा रहा है। इसलिए यह प्रयोगशाला वनस्पतियों के पोषक तत्वों का अध्ययन भी करेगा और उनके स्वास्थ्य की निगरानी भी करेगा ताकि झील में मौजूद फ़्लोटिंग द्वीप के विशिष्टता का ध्यान रखा जा सके।
10. यह फ़्लोटिंग प्रयोगशाला वैज्ञानिक अनुसंधान और सामाजिक जिम्मेदारी को भी तै करेगी क्योंकी कुछ ही वर्षों से यह झील प्रदूषकों का डंपिंग यार्ड बना हुआ है जो झील के जीव को प्रभावित कर रहा है।
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