भारत के किस शहर को कहा जाता है ‘Banana City’, जानें
आपने भारत के विभिन्न शहरों के बारे में पढ़ा और सुना होगा। देश के अलग-अलग शहरों को उनके मूल नाम के अलावा उनके उपनाम से भी जाना जाता है, जिनसे उन शहरों को वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाने में मदद मिलती है। देश के विभिन्न शहरों के बारे में जानने की अपनी इस सीरिज में हम इस लेख के माध्यम से भारत के एक और शहर के बारे में जानेंगे। क्या आपको पता है कि भारत के किस शहर को ‘Banana City’ के नाम से भी जाना जाता है। यदि नहीं, तो इस लेख के माध्यम से हम इस बारे में जानेंगे।
भारत विविधताओं का देश है, जहां की संस्कृति, अनूठी पंरपराएं, मान्यता, धर्म, ज्ञान और भाषाएं इसे अन्य देशों से अलग बनाती हैं। यहां हर शहर की अपनी खासियत है। कोई शहर अपने यहां के खान-पान के लिए मशहूर है, तो कोई शहर अपने यहां की वेशभूषा के लिए जाना जाता है।
इसके अलावा कुछ शहरों में स्थानीय स्तर पर होने वाले उत्सव पूरे देश में जाने जाते हैं। ये ही वे चीजें हैं, जो शहरों को खास बनाने का काम करती हैं। साथ ही इससे खास बनता है देश, जिससे विश्व स्तर पर देश की पहचान बनती है। देश के विभिन्न शहरों के बारे में जानने की अपनी इस सीरिज में हम इस लेख के माध्यम से एक और शहर के बारे में जानेंगे।
क्या आपको पता है कि भारत के किस शहर को ‘Banana City’ यानि केले के शहर के रूप में भी जाना जाता है। यदि नहीं, तो इस लेख के माध्यम से इस बारे में जानकारी दी गई है।
किस शहर को कहा जाता है ‘Banana City’
भारत में आपने अलग-अलग शहरों के बारे में सुना होगा। हालांकि, एक शहर ऐसा भी है, जिसे केलों का शहर कहा जाता है। आपको बता दें कि भारत के पश्चिमी घाट पर स्थित महाराष्ट्र राज्य के जलगांव को ‘Banana City’ के रूप में भी जाना जाता है। यह एक ऐसा शहर है, जो कि अपने यहां के केलों के लिए मशहूर है।
क्यों कहा जाता है केलों का शहर
जलगांव भारत का ऐसा शहर है, जहां पर केलों का सबसे अधिक उत्पादन होता है। यहां हर साल होने वाले केलों के उत्पादन की बात करें, तो यहां पर हर साल 70 टन प्रति हेक्टेयर के हिसाब से केलों की खेती की जाती है। यह अपने आप में एक बड़ा नंबर है, जिसके बाद पूरे भारत में यहां से केलों की आपूर्ति होती है।

जलगांव में ही क्यों होती है सबसे अधिक केलों की खेती
आपको बता दें कि जलगांव पश्चिमी घाट से करीब 300 किलोमीटर दूर है। इसके साथ ही यहां का वातावरण शुष्क रहता है। वहीं, केलों की खेती के लिए नमी वाले वातावरण की आवश्यकता होती है।
इसके बाद भी यहां पर सबसे अधिक केलों की उत्पादन होता है, तो आपको बता दें कि यहां पर Drip Irrigation तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। इसके साथ ही प्रति एकड़ में 1500 से 1600 तक पौधे लगाए जाते हैं।
ड्रीप इरीगेशन तकनीक में कम पानी के साथ कम समय में ही पौधों को पानी मिल जाता है। वहीं, बड़ी संख्या में केले के पेड़ पास होने के कारण इनमें गरम हवा जमा हो जाती है।
ऐसे में इससे केलों की खेती के लिए एक अनुकूल माहौल बन जाता है।
इन राज्यों में होती है केलों की खेती
भारत में केलों की आपूर्ति के लिए कुछ राज्य जाने जाते हैं, जिसमें महाराष्ट्र, तमिलनाडू, गुजरात, आंंध्रप्रदेश और कर्नाटक शामिल हैं।
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