भारत में ब्रिटिश सरकार समय-समय पर अधिनियम लाती रही है ताकि सरकार के कामकाज की जांच और प्रशासन प्रणाली में सुधार की जा सके। इसी सन्दर्भ में साइमन आयोग का गठन किया गया था। इसके अध्यक्ष सर जोन साइमन के नाम पर कहा जाता है। नेहरू रिपोर्ट भारत के लिए प्रस्तावित नए अधिराज्य के संविधान की रूपरेखा थी। अगस्त, 1928 को जारी यह रिपोर्ट अग्रेज़ी सरकार के भारतीयों के एक संविधान बनाने के अयोग्य बताने की चुनौती का भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेतृत्व में दिया गया सशक्त प्रत्युत्तर था।
साइमन कमीशन रिपोर्ट तथा नेहरु रिपोर्ट में अंतर
साइमन कमीशन रिपोर्ट | नेहरु रिपोर्ट |
1. भारत को औपनिवेशिक स्वराज्य शीघ्र देने की सिफारिश नहीं दी गई थी। | 1. भारत को औपनिवेशिक स्वराज्य शीघ्र देने की सिफारिश की गई थी। |
2. केंद्र अवाम प्रांतों में उत्तरदायी शासन की स्थापना का विरोध किया गया। | 2. केंद्र अवाम प्रांतों में उत्तरदायी शासन की स्थापना की सिफारिश की गई थी। |
3. गवर्नर-जनरल के अधिकारों में कोई कमी नहीं की गयी। | 3. गवर्नर-जनरल को केवल संवैधानिकप्रमुख का स्तर दिया गया। |
4. साम्प्रदायिक आधार पर चुनावी व्यवस्ता को जारी रखने की सिफारिश की गयी। | 4. सामूहिक प्रतिनिधित्व के आधार पर निर्वाचन की सिफ़ारिश की। इसमें मुसलमानों के लिए कुछ सीटें आरक्षित करने का सुझाव दिया गया था। |
5. नागरिकों के लिए मौलिक अधिकारों का कोई उल्लेख नहीं था। | 5. नागरिकों के लिए मौलिक अधिकारों की सिफारिश की गई थी। |
6. वयस्क मताधिकार के आधार पर प्रत्यक्ष चुनाव कराने की सिफ़ारिश नहीं की। | 6. वयस्क मताधिकार के आधार पर प्रत्यक्ष चुनाव कराने की सिफ़ारिश की गयी थी। |
7. भारत के लिए प्रतिरक्षा समिति, संघ लोक सेवा आयोग तथा उच्चतम न्यायालय इत्यादि की स्थापना का कोई उल्लेख नहीं था। | 7. भारत के लिए प्रतिरक्षा समिति, संघ लोक सेवा आयोग तथा उच्चतम न्यायालय इत्यादि की स्थापना की सिफ़ारिश की गयी थी। |
नेहरु रिपोर्ट ने खारिज कर दिया था और कहा था कि भारत के लोगों के मौलिक अधिकारों का हनन नहीं किया जा सकता है। इस रिपोर्ट ने अमेरिका के अधिकार पत्र से प्रेरणा ग्रहण की, जिसने भारत के संविधान में मूल अधिकारों सम्बन्धी प्रावधानों की आधारशिला रखी थी।
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