प्राचीन खगोलविदों और उनके योगदान पर आधारित सामान्य ज्ञान प्रश्नोत्तरी
भारत में गुप्त साम्राज्य के शासन के समय गणित, विज्ञान, खगोल विज्ञान और धर्म आदि जैसे कई क्षेत्रों का विकास हुआ जबकि चोल वंश के समय वास्तुकला, तमिल साहित्य और काँस्य जैसे कार्यों में भी बहुत विकास हुआ था। इस लेख में हमने प्राचीन खगोलविदों और उनके योगदान पर आधारित 10 सामान्य ज्ञान प्रश्नोत्तरी दिया है जो UPSC, SSC, State Services, NDA, CDS और Railways जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए बहुत ही उपयोगी है।
भारत में गुप्त साम्राज्य के शासन के समय गणित, विज्ञान, खगोल विज्ञान और धर्म आदि जैसे कई क्षेत्रों का विकास हुआ जबकि चोल वंश के समय वास्तुकला, तमिल साहित्य और काँस्य जैसे कार्यों में भी बहुत विकास हुआ था।
इस युग में ही गुरुत्वाकर्षण, ग्रहों और सौर मंडल के बारे में खोज की गई थी। इस युग में न केवल विज्ञान का बल्कि साहित्य का भी विकास हुआ, गुप्त साम्राज्य के समय में प्रसिद्ध पंचतंत्र की कहानियाँ, अत्यंत लोकप्रिय कामसूत्र, रामायण और महाभारत जैसे महाकाव्यों को भी लिखा गया था।
1. निम्नलिखित में से किस उपकरण का उपयोग आर्यभट्ट ने किया था?
A.चक्र यंत्र
B. भंगाना यंत्र
C. धनु यंत्र
D. घाटी यंत्र
Ans: A
व्याख्या: चक्र यंत्र का उपयोग आर्यभट्ट ने किया था। इसलिए, A सही विकल्प है।
2. वराह मिहिर नें कौन सी पुस्तक लिखी थी?
A. पंचसिद्धांतिका
B. बृहत्संहिता
C. बृहज्जातक
D. उपरोक्त सभी
Ans: D
व्याख्या: 550 ई. के लगभग इन्होंने तीन महत्वपूर्ण पुस्तकें बृहज्जातक, बृहत्संहिता और पंचसिद्धांतिका लिखीं। इन पुस्तकों में त्रिकोणमिति के महत्वपूर्ण सूत्र दिए हुए हैं, जो वराहमिहिर के त्रिकोणमिति ज्ञान के परिचायक हैं। इसलिए, D सही विकल्प है।
3. निम्नलिखित में से किसने कभी सुई उपकरण (शालका यंत्र) का उपयोग नहीं किया?
A. आर्यभट्ट
B. लल्ला
C. श्रीपति
D. भास्कराचार्य
Ans: A
व्याख्या: आर्यभट प्राचीन भारत के एक महान ज्योतिषविद् और गणितज्ञ थे। इन्होंने आर्यभटीय ग्रंथ की रचना की जिसमें ज्योतिषशास्त्र के अनेक सिद्धांतों का प्रतिपादन है। इन्होनें कभी भी सुई उपकरण (शालका यंत्र) का उपयोग नहीं किया। इसलिए, A सही विकल्प है।
वैदिक साहित्य पर आधारित सामान्य ज्ञान प्रश्नोत्तरी
4. तारों की स्थिति निर्धारण के लिए उपकरण विकसित किया था?
A. लल्ला
B. गणेश दैवज्ञ
C. श्रीपति
D. भास्करचार्य
Ans: B
व्याख्या: गणेश दैवज्ञ एक खगोलविद थे। उनके द्वारा रचित ग्रहलाघव प्रसिद्ध ग्रन्थ है। इन्होने ही तारों की स्थिति निर्धारण के लिए उपकरण विकसित किया था। इसलिए, B सही विकल्प है।
5. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें।
I. भास्कराचार्य ने सिद्धान्त शिरोमणि ग्रन्थ की रचना की थी।
II. इन्होने दशमलव प्रणाली की क्रमिक रूप से व्याख्या की थी।
उपरोक्त में से कौन सा कथन भास्कराचार्य के सन्दर्भ में सही है?
Code:
A. Only I
B. Only II
C. Both I and II
D. Neither I nor II
Ans: C
व्याख्या: भास्कराचार्य प्राचीन भारत के एक प्रसिद्ध गणितज्ञ एवं ज्योतिषी थे। इनके द्वारा रचित मुख्य ग्रन्थ सिद्धान्त शिरोमणि है जिसमें लीलावती, बीजगणित, ग्रहगणित तथा गोलाध्याय नामक चार भाग हैं। न्यूटन के जन्म के आठ सौ वर्ष पूर्व ही इन्होंने अपने गोलाध्याय नामक ग्रंथ में 'माध्यकर्षणतत्व' के नाम से गुरुत्वाकर्षण के नियमों की विवेचना की है। ये प्रथम व्यक्ति हैं, जिन्होंने दशमलव प्रणाली की क्रमिक रूप से व्याख्या की थी। इसलिए, C सही विकल्प है।
6. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें।
I. सिद्धांत ज्योतिष के प्रमुख आचार्य-मुहूर्त गणपति, विवाह मार्तण्ड, वर्ष प्रबोध, शीघ्रबोध, गंगाचार्य, नारद, महर्षि भृगु, रावण और वराहमिहिराचार्य।
II. संहिता ज्योतिष के प्रमुख आचार्य- मुहूर्त गणपति, विवाह मार्तण्ड, वर्ष प्रबोध, शीघ्रबोध, गंगाचार्य, नारद, महर्षि भृगु, रावण और वराहमिहिराचार्य।
उपरोक्त में से कौन सा कथन भारतीय ज्योतिष शास्त्र के सन्दर्भ में सही है?
Code:
A. Only I
B. Only II
C. Both I and II
D. Neither I nor II
Ans: D
व्याख्या: ज्योतिष शास्त्र के तीन प्रमुख भेद है: सिद्धांत ज्योतिष, संहिता ज्योतिष और होरा शास्त्र।
सिद्धांत ज्योतिष के प्रमुख आचार्य- ब्रह्मा, आचार्य, वशिष्ठ, अत्रि, मनु, पौलस्य, रोमक, मरीचि, अंगिरा, व्यास, नारद, शौनक, भृगु, च्यवन, यवन, गर्ग, कश्यप और पाराशर।
संहिता ज्योतिष के प्रमुख आचार्य- मुहूर्त गणपति, विवाह मार्तण्ड, वर्ष प्रबोध, शीघ्रबोध, गंगाचार्य, नारद, महर्षि भृगु, रावण और वराहमिहिराचार्य।
इसलिए, D सही विकल्प है।
चोल राजवंश पर आधारित सामान्य ज्ञान प्रश्नोत्तरी
7. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें।
I. राजा विक्रमादित्य द्वितीय के दरबार में नौ रत्नों में से एक थे।
II. उन्होंने 'पंचसिद्धांतिक' ग्रंथ में प्रचलित पांच सिद्धांतों- पुलिश, रोचक, वशिष्ठ, सौर (सूर्य) और पितामह का हेतु रूप से वर्णन किया था।
उपरोक्त में से कौन सा कथन वराह मिहिर के सन्दर्भ में सही है?
Code:
A. Only I
B. Only II
C. Both I and II
D. Neither I nor II
Ans: C
व्याख्या: भविष्य शास्त्र और खगोल विद्या में उनके द्वारा किए गये योगदान के कारण राजा विक्रमादित्य द्वितीय ने वराह मिहिर को अपने दरबार के नौ रत्नों में स्थान दिया। उन्होंने 'पंचसिद्धांतिक' ग्रंथ में प्रचलित पांच सिद्धांतों- पुलिश, रोचक, वशिष्ठ, सौर (सूर्य) और पितामह का हेतु रूप से वर्णन किया है। उन्होंने चार प्रकार के माह गिनाये हैं -सौर,चन्द्र, वर्षीय और पाक्षिक। इसलिए, C सही विकल्प है।
8. ज्योतिष रत्नमाला के लेखक कौन थे?
A. लल्ला
B. भास्कराचार्य
C. आर्यभट्ट
D. श्रीपति
Ans: D
व्याख्या: श्रीपति ने सिद्धांतशेखर तथा धीकोटिदकरण नामक गणित ज्योतिष विषयक और ज्योतिष रत्नमाला नामक मुहूर्त्त विषयक ग्रंथ लिखा था। इसलिए, D सही विकल्प है।
9. निम्नलिखित का मिलान करे:
Set I
a. आर्यभट्ट
b. वराह मिहिर
c. ब्रह्मगुप्त
d. श्रीपति
Set II
1. आर्यभटीय
2. पंच सिधांत
3. बृहत् जातक
4. शिधांतशेखर
Code:
a b c d
A. 1 2 3 4
B. 4 3 2 1
C. 3 4 1 2
D. 1 4 3 2
Ans: A
व्याख्या: सही मिलान नीचे दिया गया है-
आर्यभट्ट - आर्यभटीय
वराह मिहिर - पंच सिधांत
ब्रह्मगुप्त - बृहत् जातक
श्रीपति – शिधांतशेखर
इसलिए, A सही विकल्प है।
10. निम्नलिखित में से किसने गणित में संख्या के रूप में शून्य का उपयोग करने के लिए पहले नियम दिए?
A. आर्यभट्ट
B. वराह मिहिर
C. लल्ला
D. ब्रह्मगुप्त
Ans: D
व्याख्या: ब्रह्मगुप्त प्रसिद्ध भारतीय गणितज्ञ थे। वे तत्कालीन गुर्जर प्रदेश (भीनमाल) के अन्तर्गत आने वाले प्रख्यात शहर उज्जैन (वर्तमान मध्य प्रदेश) की अन्तरिक्ष प्रयोगशाला के प्रमुख थे और इस दौरान उन्होने दो विशेष ग्रन्थ लिखे: ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त और खण्डखाद्यक या खण्डखाद्यपद्धति। 'ब्रह्मस्फुटसिद्धांत' उनका सबसे पहला ग्रन्थ माना जाता है जिसमें शून्य का एक अलग अंक के रूप में उल्लेख किया गया है। यही नहीं, बल्कि इस ग्रन्थ में ऋणात्मक (negative) अंकों और शून्य पर गणित करने के सभी नियमों का वर्णन भी किया गया है। इसलिए, D सही विकल्प है।
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