जानें क्यों होता है स्कूल बसों का रंग पीला और क्या है सुप्रीमकोर्ट के दिशा निर्देश?

देश के सभी भागों में ही नहीं विश्व में भी सभी स्कूल बसों का रंग पीला होता है जिसका कारण कुछ वैज्ञानिक तथ्य होते हैं आइये डिटेल में जानें उन तथ्यों को
School Bus
School Bus

रंग का लोगों के जीवन में एक अलग ही महत्व होता है और कुछ ऐसे खास रंग होते हैं जो हमें किसी विशेष वस्तु से जोड़ते हैं उनमें से ही एक है स्कूल बसों का पीला रंगI यदि आपने गौर किया होगा तो देखा होगा कि, देश में ही नहीं विश्व में भी स्कूल बसों का रंग पीला होता है I वर्ष 1930 में अमेरिका में की गई एक रिसर्च में पुष्टि हुई कि, पीला रंग आंखों को सबसे जल्दी दिखाई देता है और सभी रंगों में से किसी भी व्यक्ति का ध्यान सबसे पहले पीले रंग पर जाता हैI  देश में स्कूल बसों को पीले रंग से रंगने का सबसे मुख्य कारण सुप्रीमकोर्ट द्वारा जारी निर्देश हैं, जिसमें सभी स्कूल बसों के लिए पीला रंग अनिवार्य किया गया था, सुप्रीम कोर्ट ने अपना निर्देश कुछ वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर दिया था आइये जानें स्कूल बसों के पीले रंगे होने के वैज्ञानिक कारण-

 

 इंद्रधनुष के स्पेक्ट्रम में सात रंग होते हैं जिन्हें VIBGYOR (वायलेट-इंडिगो-ब्लू-ग्रीन-येलो-ऑरेंज-रेड) कहा जाता है और प्रत्येक रंग की एक अलग वेवलेंथ और फ्रिक्वेंसी होती है. जैसे, लाल रंग की वेवलेंथ अन्य गहरे रंगों के मुकाबले सबसे अधिक होती है इसीलिए ट्रैफिक सिग्नल में या खतरे के निशान के लिए लाल रंग का प्रयोग किया जाता है स्कूल बसों का रंग पीला होने के पीछे भी यही कारण है. पीला हमारी आँखों को दूर से दिख जाता है, क्योंकी पीले रंग की वेवलेंथ लाल से कम और नील से अधिक होती हैI  

उल्लेखित है कि, लाल रंग  का प्रयोग खतरे के लिए किया जाता है, इसलिए इसके बाद पीले ही ऐसा रंग है, जिसका इस्तेमाल स्कूल बस के लिए किया जा सकता है. इसकी एक विशेषता ये भी है कि इसे कोहरे, बारिश और ओस जैसी विपरीत मौसमी स्थितियों में भी आराम से देखा जा सकता है. इसके अलावा लाल रंग की तुलना में पीले रंग की लैटरल पेरिफेरल विजन 1.24 गुना अधिक होती है. इसलिए स्कूल बसों को रंगने के लिए पीले रंग का इस्तेमाल किया जाता हैI   

स्कूल बसों से सम्बंधित सुप्रीमकोर्ट के दिशा निर्देश -

सभी स्कूल बसों का रंग पीला होगा 
सभी स्कूल बसों के आगे और पीछे "School Bus" लिखा होना जरुरी हैI
सभी स्कूल बसों में फर्स्टऐड बॉक्स होना अनिवार्य है 
बस की खिड़कियों के बीच में ग्रिल लगी होनी चाहिए. 
साथ ही स्कूल से जुड़ी हर जानकारी बस पर लिखी होनी चाहिए. जैसे स्कूल का पता फ़ोन नंबर आधी  
सीट में बैग रखने के लिए अलग जगह होनी चाहिए. 
बच्चों के लिए एक अटेंडेंट होना चाहिए.
स्कूल बस की गति अधिकतम 40 किलोमीटर प्रति घंटे होनी चाहिए 

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