भारत की जैव विविधता पर सारांश

भारत एक बहुत बडा विविधता वाला देश है जहां दुनिया की लगभग 10% प्रजातियां रहती हैं। लाखों वर्षों तक भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत रही थी। इसीलिए इसे एक वृहद (मेगा) विविधता वाले देश के रूप में जाना जाता है। इस लेख में हमने भारत की जैव विविधता पर सारांश दिया है जो UPSC, SSC, State Services, NDA, CDS और Railways जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए बहुत ही उपयोगी है।
Mar 30, 2018 16:52 IST
    Summary on the Biodiversity in India in Hindi

    प्रजातियों और पारिस्थितिकी प्रणालियों से पर्यावरण सेवाओ के साथ-साथ उनके संरक्षण की भी जिम्मेदारी ना केवल वैश्विक स्तर होनी चाहिए अपितु , क्षेत्रीय और स्थानीय स्तरों पर आवश्यक हैं। भारत एक बहुत बडा विविधता वाला देश है जहां दुनिया की लगभग 10% प्रजातियां रहती हैं। लाखों वर्षों तक भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत रही थी। इसीलिए इसे एक वृहद (मेगा) विविधता वाले देश के रूप में जाना जाता है।

    भारत की जैव विविधता पर सारांश

    भारत में वनस्पति और जीव

    अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) के अनुसार, भारत में उष्‍ण से अतिशीतल जलवायु स्थिति के व्‍यापक क्षेत्र के साथ एक प्रचुर और विभिन्‍न प्रकार की वनस्‍पति और जीव पाए जाते है। विश्व का 7-8% वनस्पति और जीव की प्रजातियां भारत में पाए जाते हैं।

    1. भारत में पौधों की लगभग 45,000 प्रजातियां पायी जाती हैं, जो दुनिया के कुल आबादी का लगभग 7% हैं। पौधों की लगभग 1336 प्रजातियों के लुप्त होने का खतरा है।

    2. भारत में लगभग 15,000 फूल की प्रजातियां पायी जाती हैं, जो दुनिया के कुल आबादी का लगभग 6% है। इनमे से लगभग 1,500 फूल की प्रजातियां लुप्तप्राय हैं।

    3. भारत में 91,000 पशुओ की प्रजातियां पायी जाती हैं, दुनिया के कुल आबादी का लगभग 6.5% है। इनमें 60,000 कीट प्रजातियों, 2,456 मछली प्रजातियां, 1,230 पक्षी प्रजातियां, 372 स्तनपायी, 440 सरीसृप और 200 उभयचर, जिनमें पश्चिमी घाटों में सबसे अधिक एकाग्रता और 500 मोलस्क शामिल हैं।

    4. भारत में भेड़ की 400, मवेशियों की 27 और बकरियो की 22 प्रजातियां पायी जाती हैं।

    5. भारत में एशिया के कुछ पशुओ की प्रजातियां पायी जाती हैं जो विश्व स्तर पर दुर्लभ प्रजातियों में एक हैं जैसे कि बंगाली लोमड़ी, एशियाटिक चीता, मारबल्ड कैट, एशियाटिक शेर, भारतीय हाथी, एशियाई जंगली गधा, भारतीय गैंडा, माखोर, गौर, जंगली एशियाटिक जल भैंस आदि।

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    जैव विविधता का वर्गीकरण

    1. मलय की जैव विविधता

    इस तरह की जैव विविधता पूर्वी हिमालय के घने जंगलों वाले क्षेत्रों और तटीय क्षेत्रों  में पाए जाते हैं।

    2. इथियोपियाई जैव विविधता

    राजस्थान के शुष्क और अर्ध शुष्क क्षेत्रों में इस तरह की जैव विविधता मिलती है।

    3. यूरोपीय जैव विविधता

    इस प्रकार की जैव विविधता ऊपरी हिमालय के इलाकों में पाए जाते हैं जहां जलवायु समशीतोष्ण होती हैं।

    4. भारतीय जैव विविधता

    भारतीय मैदान के घने जंगल क्षेत्रों में इस तरह की जैव विविधता पायी जाती है।

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    भारत के जैव भौगोलिक क्षेत्र और प्रांत

    जैव-भूगोलविदों ने भारत को विशेषता, जलवायु, मिट्टी और जैव विविधता के साथ प्रत्येक क्षेत्र को दस जैव-भौगोलिक क्षेत्रों में वर्गीकृत किया है। भूगोल, जलवायु और वनस्पति के स्वरूप तथा उनमें रहने वाले स्तनधारी, पक्षी, सरीसृप, उभयचर, कीड़े और अन्य अकशेरुकी समुदायों के आधार पर 25 जैव-भौगोलिक प्रांतो  में विभाजित किया गया है:

    1. ट्रांस हिमालय: इस क्षेत्र के तीन प्रांत आते हैं- लद्दाख की पहाड़, तिब्बती पठार, सिक्किम के पास ट्रांस-हिमालय क्षेत्र

    2. हिमालय: इस क्षेत्र के चार प्रांत आते हैं- उत्तर-पश्चिम हिमालय, पश्चिम हिमालय, मध्य हिमालय और पूर्वी हिमालय

    3. भारतीय मरुस्थल: इस क्षेत्र के एक प्रांत आते हैं – गुजरात और राजस्थान का थार और कच्छ इलाका।

    4. अर्ध-शुष्क क्षेत्र: इस क्षेत्र में तीन प्रांत आते हैं- पंजाब, गुजरात और राजस्थान

    5. पश्चिमी घाट: इस क्षेत्र के दो प्रांत आते हैं - मालाबार की मैदाननी क्षेत्र और पश्चिमी घाट की पहाड़ी।

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    6. दक्कन का पठार: इस क्षेत्र के पांच प्रांत आते हैं - सेंट्रल भारत की पहाड़ी, छोटा नागपुर, पूर्व की पहाड़ी, सेंट्रल पठारी इलाका और डेक्कन का दक्षिण हिस्सा।

    7. तटीय क्षेत्र: इस क्षेत्र के तीन प्रांत आते हैं - पश्चिम तट, पूर्वी तट और लक्षद्वीप।

    8. गंगा के मैदान: ऊपरी गंगा के मैदानों और निचले गंगा के मैदान इस क्षेत्र के अन्तर्गत आते हैं।

    9. उत्तर पूर्व भारत: इस क्षेत्र में दो प्रांत आते हैं- ब्रह्मपुत्र घाटी और उत्तर-पूर्व की पहाड़। यह भारत के लगभग 5.2% भूभाग पर फैला है।

    10. द्वीप समूह: इस क्षेत्र में एक ही प्रांत आता है- अंडमान और निकोबार। यहाँ बायोम अत्यधिक विविध है।

    जैसा कि हम जानते हैं कि भारत विश्व भर में अपने जैव विविधता के लिए जाना जाता है लेकिन जलवायु परिवर्तन तथा कुछ भारतीयों के दोहन कृत्यों की वजह से कई पौधे और जानवर विलुप्त होने के कगार पर पहुच गए हैं। वन्यजीव अधिनियम के तहत 253 प्रजातियां प्रजातियों का उल्लेख है जिनको पर्याप्त संरक्षण की जरुरत है और भारत के वनस्पति सर्वेक्षण ने 135 पौधों को लुप्तप्राय के रूप में पहचान की है।

    पर्यावरण और पारिस्थितिकीय: समग्र अध्ययन सामग्री

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