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जानिए भारत के किस राज्य के विधायक की सैलरी कितनी है?

12-JAN-2018 00:57
    Salary of MLAs in India

    भारत में 31 राज्यों (2 केंद्र शासित प्रदेश दिल्ली और पुदुचेरी को मिलाकर) में कुल 4120 विधायक हैं. राज्य विधानसभा के लिए चुने जाने वाले विधायकों को प्रत्येक राज्य में हर साल 1 करोड़ से लेकर 4 करोड़ तक का विधायक फण्ड दिया जाता है. यह फंड हर राज्य में अलग-अलग होता है जैसे मध्य प्रदेश में एक विधायक को हर साल अपने क्षेत्र का विकास करने के लिए 4 करोड़ रुपये दिए जाते है जबकि कर्नाटक में 2 करोड़ रुपये.
    क्या आप जानते हैं कि हर विधायक को विधायक फण्ड के अलावा हर महीने एक निश्चित सैलरी मिलती है. यह सैलरी हर राज्य में अलग अलग है. भारत में सबसे अधिक सैलरी 2.5 लाख  रुपये प्रति माह तेलंगाना के विधायकों को मिलती है जबकि सबसे कम सैलरी 34000 रुपये त्रिपुरा के विधायकों को मिलती है.
    आइये इस लेख में जानते हैं कि भारत के हर राज्य के विधायकों को कितनी सैलरी मिलती है.

    राज्य

    विधायक की सैलरी एवं भत्ते

     1. तेलंगाना

     2.50 लाख

     2. दिल्ली

     2.10 लाख

     3. उत्तर प्रदेश

     1.87 लाख

     4. महाराष्ट्र

     1.70 लाख

     5. जम्मू & कश्मीर

     1.60 लाख

     6. उत्तराखंड

     1.60 लाख

     7. आन्ध्र प्रदेश

     1.30 लाख

     8. हिमाचल प्रदेश

     1.25 लाख

     9. राजस्थान

     1.25 लाख

     10. गोवा

     1.17 लाख

     11. हरियाणा

     1.15 लाख

     12. पंजाब

     1.14 लाख

     13. झारखण्ड

     1.11 लाख

     14. मध्य प्रदेश

     1.10 लाख

     15. छत्तीसगढ़

     1.10 लाख

     16. बिहार

     1.14 लाख

     17. पश्चिम बंगाल

     1.13 लाख

     18. तमिलनाडु

     1.05 लाख

     19. कर्नाटक

     98 हजार

     20. सिक्किम

     86.5 हजार

     21. केरल

     70  हजार

     22. गुजरात

     65 हजार

     23. ओडिशा

     62 हजार

     24. मेघालय

     59 हजार

     25. पुदुचेरी

     50 हजार

     26. अरुणाचल प्रदेश

     49 हजार

     27. मिजोरम

     47 हजार

     28. असम

     42  हजार

     29. मणिपुर

     37 हजार

     30. नागालैंड

     36 हजार

     31. त्रिपुरा

     34 हजार

    विधायक को सैलरी के अलावा और क्या क्या सुविधाएँ मिलतीं हैं?
    आइये भारत के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश के एक विधायक को मिलने वाली सुविधाओं का जायजा लेते हैं.
    उत्तर प्रदेश में एक विधायक को विधायक निधि के रूप में 5 साल के अन्दर 7.5 करोड़ रुपये मिलते हैं. इसके अलावा विधायक को वेतन के रूप में 75 हजार रुपया महीना, 24 हजार रुपये डीजल खर्च के लिए, 6000 पर्सनल असिस्टेंट रखने के लिए, मोबाइल खर्च के लिए 6000 रुपये और इलाज खर्च के लिए 6000 रुपये मिलते हैं.सरकारी आवास में रहने, खाने पीने, अपने क्षेत्र में आने-जाने के लिए अलग से खर्च मिलता है. इन सभी को मिलाने पर विधायक को हर माह कुल 1.87 लाख रुपये मिलते हैं.

    एक मिनट में संसद में कितना खर्च होता है?

    विधायक को यह अधिकार भी मिला होता है कि वह अपने क्षेत्र में पानी की समस्या के समाधान के लिए 5 साल में 200 हैण्डपम्प भी लगवा सकता है जबकि एक पम्प लगवाने का खर्च लगभग 50 हजार आता है. इसके अलावा विधायक के साथ रेलवे में सफ़र करने पर एक व्यक्ति फ्री में यात्रा कर सकता है.

    handpump
    रिटायरमेंट के बाद क्या फायदे मिलते हैं ?
    कार्यकाल ख़त्म होने के बाद विधायक को हर महीने 30 हजार रुपये पेंशन में रूप में मिलते हैं, 8000 रुपये डीजल खर्च के रूप में मिलने के साथ साथ जीवन भर मुफ्त रेलवे पास और मेडिकल सुविधा का लाभ मिलता है. यानिकी एक लाइन में कहें तो एक बार विधायक बनने के बाद पूरी लाइफ सुरक्षित हो जाती है.

    यहाँ पर यह प्रश्न उठ सकता है कि इन राज्यों के विधायकों की सैलरी में इतना अंतर कैसे होता है. दरअसल विधायक को सैलरी सम्बंधित राज्य के खजाने से ही मिलती है. इस कारण जिन राज्यों के पास अधिक धन है वे अपने विधायकों को ज्यादा सैलरी देते हैं. पूर्वोत्तर भारत के सभी राज्यों में विधायकों को सबसे कम सैलरी मिलती है क्योंकि इन राज्यों के पास संसाधन कम मात्रा में हैं.
    ज्ञातव्य है कि पिछले 7 सालों में विधायकों की औसत सैलरी में लगभग 125% की वृद्धि हो चुकी है. सैलरी में सबसे अधिक वृद्धि 450% दिल्ली के विधायकों और उसके बाद तेलंगाना के विधायकों की सैलरी में 170% की वृद्धि हुई है.
    सांसदों की सैलरी विधायकों की औसत सैलरी की तुलना में 2 गुना ज्यादा है. सांसद को हर माह 2.91 लाख रुपये मिलते हैं इसमें 1.40 लाख रुपये की बेसिक सैलरी और 1.51 लाख रुपये का भत्ता शामिल होता है.

    वर्तमान में भारत के राष्ट्रपति को हर महीने 1.50 लाख रुपये, उप-राष्ट्रपति को हर महीने 1.25 लाख रुपये, प्रधानमन्त्री को 1.65 लाख रुपये, राज्यपाल को 1.10 लाख रुपये, सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को हर महीने 1.10 लाख रुपये जबकि कैबिनेट सचिव को 2.50 लाख रूपये मिलते हैं.

    हालाँकि सरकार जल्दी ही राष्ट्रपति की सैलरी को बढाकर 5 लाख रुपये करने वाली है क्योंकि कैबिनेट सचिव को 2.50 लाख रूपये मिलते जो कि राष्ट्रपति से ज्यादा हैं और राष्ट्रपति के पद की गरिमा के लिए ठीक नही है कि एक कर्मचारी भारत के सबसे बड़े पद पर आसीन व्यक्ति से ज्यादा सैलरी प्राप्त करे.
    भारत के राष्ट्रपति को क्या वेतन और सुविधाएँ मिलती हैं?

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