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महमूद गजनी द्वारा भारत पर किये गए हमलों का विस्तृत विवरण

महमूद गजनी “सुबुक्तगिन” का पुत्र था और उसकी नीति अपने पिता की तरह भारत पर विजय प्राप्त करना था, जिन्होंने अपने 20 साल के शासन के बाद सिंधु नदी के दूसरे ओर साम्राज्य का विस्तार किया था। महमूद गजनी एक उत्कृष्ट सेनापति और महान विजेता थाl उसने 1000-1027 ईस्वी के दौरान भारत पर 17 बार आक्रमण कियाl इनमें से सबसे महत्वपूर्ण आक्रमण 1025 ईस्वी में सोमनाथ मंदिर पर किया गया आक्रमण था, क्योंकि इससे महमूद गजनी को एक विशाल खजाना प्राप्त हुआ थाl
Apr 21, 2017 13:03 IST
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महमूद गजनी “सुबुक्तगिन” का पुत्र था और उसकी नीति अपने पिता की तरह भारत पर विजय प्राप्त करना था, जिन्होंने अपने 20 साल के शासन के बाद सिंधु नदी के दूसरे ओर साम्राज्य का विस्तार किया था। महमूद गजनी एक उत्कृष्ट सेनापति और महान विजेता थाl उसने 1000-1027 ईस्वी के दौरान भारत पर 17 बार आक्रमण कियाl इनमें से सबसे महत्वपूर्ण आक्रमण 1025 ईस्वी में सोमनाथ मंदिर पर किया गया आक्रमण था, क्योंकि इससे महमूद गजनी को एक विशाल खजाना प्राप्त हुआ थाl

 Mahmud of Ghazni

भारत में महमूद गजनी के विभिन्न अभियानों का कालक्रम

1000 ईस्वी: हिन्दू शाही साम्राज्य पर हमला, जिसके फलस्वरूप सीमा क्षेत्रों और कुछ रणनीतिक किलों पर कब्जा किया गयाl

1001-02 ईस्वी: पेशावर और वाईहिंद पर हमला, जिसके फलस्वरूप वहां के शासक जयपाल को बंदी बना लिया, लेकिन फिरौती का भुगतान करने पर आजाद कर दिया गयाl

1004-05 ईस्वी: खैबर पास से मुल्तान जाने वाले व्यापारिक मार्ग पर स्थित भाटिया के किले पर हमला, वहां के शासक “भाजी” या “बिजी राय” ने युद्ध में वीरता का प्रदर्शन किया, लेकिन उसकी हार हुईl

1006 ईस्वी: मुल्तान पर हमला, वहां के शासक “फतेह दाद” ने हिन्दू शाही शासक आनन्दपाल से मदद मांगी, लेकिन युद्ध में दोनों की हार हुईl

1006-07 ईस्वी: “बेहरा” के शासक “बिजी राय” की पराजय, इसके बाद “बेहरा” का शासन “सुखपाल” को सौंप दिया गया जिसने इस्लाम धर्म को अपना लियाl बाद में, “सुखपाल” ने इस्लाम धर्म को अस्वीकार कर दिया, जिसके परिणामस्वरूप उसे सत्ता से बेदखल कर कैद में डाल दिया गयाl

1008-09: वाईहिंद की दूसरी लड़ाई, इसके अलावा उज्जैन, ग्वालियर, कालिंजर, कन्नौज, दिल्ली और अजमेर के शासकों को भी पराजित किया गया और नागरकोट में लूटपाट की गईl

1009-10 ईस्वी: अलवर (राजस्थान) के निकट नारायणपुर पर हमला किया गया, वहां के शासक को पराजित कर उसके पूरे राजकोष को लूट लिया गयाl

1010-11 ईस्वी: मुल्तान पर कब्जा, मुल्तान का शासक राजा दाउद वफादार सहयोगी के रूप में कार्य करने में नाकाम रहा और पुरानी विधर्मी प्रथाओं पुनः शुरू कियाl जिसके परिणामस्वरूप उसे कैद कर लिया गया और पद से हटा दिया गया थाl महमूद ने मुल्तान के गवर्नर के रूप में एक तुर्क सैन्य अधिकारी को नियुक्त कियाl

1011-12 ईस्वी: थानेश्वर पर हमला

1013-14 ईस्वी: नंदनाह पर कब्जा

1015-16 ईस्वी: कश्मीर अभियान, जो अधूरा रहा

1018-19 ईस्वी: कन्नौज में लूटपाट

1020-21 ईस्वी: कालिंजर पर हमला

1021-22 ईस्वी: लाहौर पर हमला

1025-26 ईस्वी: सोमनाथ में लूटपाट

1027 ईस्वी: सिन्धु क्षेत्र के जाटों के खिलाफ दंडात्मक अभियान

भारत में गजनी के शासन के पतन का कारण

1. साम्राज्य के आंतरिक सुदृढ़ीकरण और संगठन पर थोड़ा ध्यान या कोई ध्यान नहीं दिया गया थाl

2. बाहरी सुरक्षा में सैन्य शक्ति का अतिरिक्त इस्तेमाल किया गया थाl

3. महमूद गजनी के उत्तराधिकारी अक्षम थेl

4. सिंहासन के उत्तराधिकार से संबंधित निश्चित और सार्वभौमिक कानून के अभाव के कारण महमूद गजनी के उत्तराधिकारियों के बीच लगातार लड़ाई हुई।

5. गौड़ के राजा “अलाउद्दीन हुसैन” ने 1155 ईस्वी में गजनी पर हमला किया। 1192 ईस्वी में मोहम्मद गौरी ने गजनी साम्राज्य के अंतिम शासक खुसरो मलिक की हत्या कर दीl

6. सेना पर नियंत्रण की कमी थीl

7. लूटपाट या युद्ध के बाद प्राप्त धन-सम्पति के अलावा आय का कोई नया स्रोत नहीं थाl

महमूद को एक महान समझा गया था, लेकिन उसने इस्लाम को महिमामंडित करने के लिए “शिकन या विनाशकारी” की छवि धारण कर ली थीl उसने तीन व्यक्तियों फिरदौसी (कवि), अलबरूनी (विद्वान) और उत्बी (इतिहासकार) को संरक्षण प्रदान किया थाl उसने शैया राजवंश द्वारा शासित प्रदेशों को छोड़कर अन्य भारतीय प्रदेशों पर कब्जा करने के लिए कोई व्यवस्थित प्रयास नहीं किया थाl

इसके वाबजूद महमूद गजनी को भारत में तुर्क शासन के संस्थापक के रूप में देखा जा सकता है क्योंकि उसके विजय अभियानों ने उत्तर-पश्चिम के शासकों के लिए भारत पर विजय प्राप्त करने का मार्ग प्रशस्त किया थाl

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