गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) एक्ट, 1967 क्या है?

Feb 12, 2020, 16:05 IST

गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) एक्ट, 1967 का उद्देश्य भारत विरोधी (भारत और विदेशी जमीन पर) गैरकानूनी गतिविधियों की प्रभावी रोकथाम करना है. अर्थात यह एक्ट भारत की अखंडता और संप्रभुता के लिए खतरा पैदा करने वाली गतिविधियों से निपटने के लिए शक्तियां उपलब्ध कराता है. संसद ने इस एक्ट में संशोधन कर इसे और सख्त बनाया है. 

UAPA: Meaning and Amendment Bill, 2019
UAPA: Meaning and Amendment Bill, 2019

गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) संशोधन बिल, 2019 को गृह मामलों के मंत्री अमित शाह ने 8 जुलाई, 2019 को लोकसभा में पेश किया था जिसे 24 जुलाई को लोकसभा द्वारा पास कर दिया गया था. 

यह बिल गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) एक्ट, 1967 में संशोधन करता है. यह एक्ट आतंकी और नक्सलवादी गतिविधियों को काबू में करने के लिए पुराने एक्ट में कुछ बदलाव करता है ताकि भारत के खिलाफ होने वाली आतंकी गतिविधियों से कड़ाई से निपटा जा सके.

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आइये जानते हैं कि इस कानून के तहत कौन सी गतिविधियों को गैरकानूनी गतिविधियों के रूप में माना जाता है और इस अधिनियम में क्या बदलाव किए गए हैं?
गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) संशोधन बिल, 2019 व्यक्तियों और संगठनों की गैरकानूनी गतिविधियों और आतंकवादी गतिविधियों और अन्य संबंधित मामलों से निपटने के लिए इस कानून को और अधिक प्रभावी और सक्षम बनाता है.

इस अधिनियम का विस्तार और अनुप्रयोग (Extent and Application of this Act)

1. यह कानून पूरे देश में लागू है.

2. UAPA  के तहत आरोपित कोई भी भारतीय या विदेशी नागरिक इस अधिनियम के तहत सजा के लिए उत्तरदायी है, भले ही अपराध किसी भी जगह पर किया गया हो.

3. इस अधिनियम के प्रावधान भारतीय और विदेशी नागरिकों पर भी लागू होते हैं.

4. यदि कोई पानी का जहाज और एयरक्राफ्ट भारत में पंजीकृत है, तो उस पर सवार व्यक्ति किसी भी देश में हो, उन पर यह कानून लागू होता है.

भारत में गैरकानूनी गतिविधि की परिभाषा (Definition of the Unlawful Activity in India)

गैरकानूनी गतिविधि में "व्यक्ति या संघ द्वारा किये गए निम्न कार्यों/गतिविधियों को शामिल किया गया है जैसे; शब्दों के द्वारा, लिखित, कार्यों के द्वारा, संकेतों द्वारा, भारत की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता को बाधित करने या तोड़ने का कोई भी प्रयास.

unlawful activity” refers any action taken by individual or association (whether by committing an act or by words, either spoken or written, or by signs to questions, disclaims, disrupts or is intended to disrupt the territorial integrity and sovereignty of India.

इस एक्ट के अंतर्गत केंद्र सरकार किसी संगठन को आतंकवादी संगठन घोषित कर सकती है, अगर वह: 

(a) आतंकवाद को बढ़ावा देता है, 

(b)  अन्यथा आतंकवादी गतिविधि में शामिल है,

(c) आतंकवादी घटना को अंजाम देने की तैयारी करता है, 

(d) आतंकवादी कार्रवाई करता है या उसमें भाग लेता है,

यह बिल, सरकार को अधिकार देता है कि वह समान आधार पर व्यक्तियों को भी आतंकवादी घोषित कर सकती है.

यह अधिनियम, भारतीय क्षेत्र के एक हिस्से के कब्जे या संघ से भारत के क्षेत्र के एक हिस्से के अलगाव को भी प्रतिबंधित करता है. अर्थात यदि कोई व्यक्ति या संगठन या व्यक्तियों का  समूह, भारत के किसी हिस्से पर कब्ज़ा करने की कोशिश करता है या उसको भारत से अलग करने की कोशिश करता है तो उसके विरुद्ध भी कानूनी कार्रवाही इसी एक्ट के प्रावधान के तहत की जाएगी. जैसे सिखों द्वारा ‘खालिस्तान’ की मांग और मुसलमानों द्वारा ‘सिमी’ का गठन.

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मौलिक अधिकारों पर उचित प्रतिबन्ध (Fundamental Rights and UAPA)

राष्ट्रीय एकता परिषद, संविधान (16वां संशोधन) अधिनियम, 1963, ने भारत की संप्रभुता और अखंडता के हितों में संसद को मौलिक अधिकारों पर उचित प्रतिबन्ध लगाने की शक्ति प्रदान की है.

ये प्रतिबन्ध लागू हो सकते हैं;

(a) भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता,

(b) शांतिपूर्वक और हथियारों के बिना एकत्र होने का अधिकार,

(c) एसोसिएशन या यूनियन बनाने का अधिकार

गैरकानूनी गतिविधियों (रोकथाम) अधिनियम, 1967 में परिवर्तन (Changes in the The Unlawful Activities (Prevention) Act, 1967)

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने न केवल एनआईए अधिनियम 2008 को बदल दिया, बल्कि गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम, 1967 को भी बदल दिया है. लोकसभा ने एनआईए संशोधन अधिनियम, 2019 को 15 जुलाई, 2019 को पारित किया और राज्यसभा ने इसे 17 जुलाई 2019 को पारित किया था.

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गैरकानूनी गतिविधियों (रोकथाम) अधिनियम की अनुसूची 4 में संशोधन, एनआईए को एक यह अधिकार देगा कि वह एक व्यक्ति को केवल आतंकी या आतंकियों से सम्बन्ध रखने की आशंका में गिरफ्तार कर ले.

वर्तमान में केवल संगठनों को 'आतंकवादी संगठन' के रूप में नामित किया गया है, लेकिन UAPA, 1967 में बदलाव के बाद, एक ‘व्यक्ति’ को संदिग्ध आतंकवादी भी कहा जा सकता है.

गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम, 1967 के तहत गिरफ्तारी के मामले (Famous arrest under the The Unlawful Activities (Prevention) Act, 1967)

1. बिनायक सेन, एक डॉक्टर और मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं, उन्हें 2007 में कथित रूप से अवैध नक्सलियों का समर्थन करने के लिए हिरासत में लिया गया था.

2. सुधीर धवाले, दलित अधिकार कार्यकर्ता, 2018 में गिरफ्तार

3. महेश राउत, 2018 में गिरफ्तार आदिवासी अधिकार कार्यकर्ता 

4. वरवारा राव, कवि, 2018 में गिरफ्तार

5. सुरेंद्र गडलिंग, दलित और आदिवासी अधिकार वकील, 2018 में गिरफ्तार

6. शोमा सेन, प्रोफेसर, 2018 में गिरफ्तार

7. सुधा भारद्वाज, आदिवासी अधिकार कार्यकर्ता, 2018 में गिरफ्तार 

8. रोना विल्सन, अनुसंधान विद्वान, 2018 में गिरफ्तार 

9. गौतम नवलखा, पत्रकार और पीपुल्स यूनियन फॉर डेमोक्रेटिक राइट्स (PUDR) के सदस्य, 2018 में गिरफ्तार 

इस अधिनियम के लिखित उपर्युक्त प्रावधानों से पता चलता है कि गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम, 1967 पहले से ही एक बहुत ही सख्त कानून था लेकिन हाल के बदलावों ने इसे और भी सख्त बना दिया है.

इन हालिया बदलावों के मद्देनजर विपक्षी दलों के नेता चिंतित हैं कि सरकार इस कानून का दुरुपयोग करेगी जैसा कि हमने आतंकवाद निरोधक अधिनियम (POTA) के मामले में देखा था. 

इस बात की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है कि सरकार इस कानून का प्रयोग अपने विरोधी लोगों और संस्थाओं की आवाज को दबाने के लिए कर सकती है. चूंकि इसमें संसद को मौलिक अधिकारों पर उचित प्रतिबन्ध लगाने की शक्ति प्रदान की गयी है इसलिए यह मामला बहुत संजीदा हो जाता है. 

अतः सरकार को इस मसले पर सूझबूझ से काम लेना होगा ताकि देश की एकता और अखंडता को बनाये रखते हुए मौलिक अधिकारों की रक्षा भी की जा सके. हमें उम्मीद है कि गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967 देश की अखंडता और संप्रभुता की रक्षा करने में सक्षम होगा.

Hemant Singh is an academic writer with 7+ years of experience in research, teaching and content creation for competitive exams. He is a postgraduate in International
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