नेट न्यूट्रैलिटी किसे कहते हैं?

नेट न्यूट्रैलिटी का मतलब है कि इन्टरनेट पर हर यूजर के साथ समानता का व्यवहार किया जाये. अर्थात सभी यूजर्स को सोशल मीडिया, ईमेल, वॉइस कॉल, ऑनलाइन शॉपिंग और यूट्यूब वीडियो जैसी सुविधाओं का इस्तेमाल करने के लिए इन्टरनेट की एक समान स्पीड और एक्सेस उपलब्ध हो.
Created On: Jan 30, 2018 00:00 IST
Net Neutrality-Meaning
Net Neutrality-Meaning

नेट न्यूट्रैलिटी किसे कहते हैं?
नेट न्यूट्रैलिटी का मतलब है कि इन्टरनेट पर हर यूजर के साथ समानता का व्यवहार किया जाये. अर्थात सभी यूजर्स को सोशल मीडिया, ईमेल, वॉइस कॉल, ऑनलाइन शॉपिंग और यूट्यूब वीडियो जैसी सुविधाओं का इस्तेमाल करने के लिए इन्टरनेट की एक समान स्पीड और एक्सेस उपलब्ध हो. ऐसा ना हो कि किसी बड़ी कंपनी की साईट जल्दी ओपन हो जाये और किसी छोटी कंपनी की साईट खुलने में बहुत समय ले या खुले ही नही. अर्थात इन्टरनेट पर हर यूजर के साथ समानता का व्यवहार ही नेट न्यूट्रैलिटी कहलाता हैं. ज्ञातव्य है कि नेट न्यूट्रैलिटी (इंटरनेट तटस्थता) शब्द दस साल पहले चलन में आया था.
अर्थात नेट न्यूट्रैलिटी (इंटरनेट तटस्थता) वो सिद्धांत है जिसके तहत माना जाता है कि इंटरनेट सर्विस प्रदान करने वाली कंपनियां; इंटरनेट पर हर तरह के डाटा को एक जैसा दर्जा देंगी.
इंटरनेट सर्विस देने वाली इन कंपनियों में टेलीकॉम ऑपरेटर्स भी शामिल हैं. इन कंपनियों को अलग अलग डाटा के लिए अलग-अलग कीमतें नहीं लेनी चाहिए. जैसे वाट्सऐप से वीडियो कालिंग करने के लिए ज्यादा डाटा खर्च हो और स्पीड भी स्लो हो लेकिन यूट्यूब देखने के लिए डाटा कम इस्तेमाल हो और वीडियो बिना रुके चले.

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नेट न्यूट्रैलिटी की क्या मुख्य विशेषाएं हैं?
1. इन्टरनेट सर्विस प्रोवाइडर के नेटवर्क पर सभी ऑनलाइन कंटेंट को सामान अधिकार मिला हुआ है.
2. इन्टरनेट सर्विस प्रोवाइडर किसी खास वेबसाइट को धीमा या तेज नही कर सकते अर्थात ऐसा नही हो सकता कि अमेज़न की साईट जल्दी खुल जाये और फ्लिपकार्ट की साईट देर से खुले.
3. सभी यूजर्स के पास समान पैकेटों में डाटा भेजा जाता है.
अर्थात वर्तमान में आप किसी भी तरह की वेब साइट ओपन कर रहे हो, चाहे वह गूगल, फेसबुक या कोई अन्य छोटी वेबसाइट ही क्यों न हो, आपके इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर इन कनेक्शनों को समान रूप से मानते हैं और एक ही स्पी ड से आपको डेटा भेजते हैं. उन्हेक किसी विशेष ट्रैफिक को स्लोस या फास्टे करने कि अनुमति नहीं हैं.

लेकिन यदि नेट न्यूट्रैलिटी को ख़त्म कर दिया जाता है तो ऐसा नही होगा और विभिन्न कंपनियों की साईट खुलने में अंतर होगा और सेवाओं के मूल्यों के भी वृद्धि होगी.

अगर बिलकुल आसान शब्दों में कहें तो नेट न्यूट्रैलिटी किसी रोड के ट्रैफिक जैसा ही है जिस पर हर वाहन को समान गति से चलने का अधिकार है. ऐसा नही है कि 1 करोड़ की गाड़ी वाला 5 लाख की गाड़ी वाले से तेज चलेगा और महँगी गाड़ी को एम्बुलेंस की तरह अन्य गाड़ियों से आगे निकाला जायेगा.

net neutrality example
यदि नेट न्यूट्रैलिटी ख़त्म हो गयी तो क्या होगा?
1. सर्विस प्रोवाइडर या ब्रांडेड कम्पनियाँ अपने नेटवर्क पर दूसरी साइट्स को ब्लॉक कर सकती हैं.
2. सर्विस प्रोवाइडर किसी खास वेबसाइट की एक्सेस के लिए ज्यादा पैसे ले सकते हैं या फिर इन सेवाओं के लिए अलग से डाटा कीमतें तय की जा सकती हैं. जैसे एयरटेल कह सकता है कि यदि उसके यूजर व्हॉट्स ऐप पर वीडियो कालिंग का मजा लेना चाहते हैं तो उन्हें अलग से 100 रुपये का  डाटा पैक खरीदना पड़ेगा. अभी यह सर्विस यूजर को मुफ्त में मिली हुई है.
3. सर्विस प्रोवाइडर किसी विशेष कंपनी के कंटेंट को वरीयता दे सकते हैं. उदाहरण के लिए व्हॉट्स ऐप की डाटा स्पीड को धीमा करके स्काइप की डाटा स्पीड को तेज किया जा सकता है.
4. कोई कंपनी किसी इन्टरनेट सर्विस प्रोवाइडर को ज्याजदा पैसे देकर अपने कंटेंट को अनब्लॉहक कर और अपने प्रतिद्वंद्वियों के कंटेंट को ब्लॉोक कर सकती हैं.
5. सर्विस प्रोवाइडर कुछ सेवाओं को ब्लॉक कर सकते हैं या उनकी स्पीड को सुस्त कर सकते हैं ताकि यूजर के लिए इनका इस्तेमाल मुश्किल हो जाए. जैसे यू ट्यूब की वीडियो स्पीड को कम किया जा सकता है.
सवाल उठता है कि टेलीकॉम कंपनियां इंटरनेट नेटवर्क की तटस्थता के ख़िलाफ़ क्यों हैं?
टेलीकॉम कंपनियां इस बात से परेशान हैं कि नई तकनीकी ने उनके कारोबार के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं. उदाहरण के लिए SMS सेवा को व्हॉट्स ऐप जैसे मुफ़्त ऐप ने लगभग ख़त्म ही कर दिया है. इससे टेलीकॉम कंपनियों की आमदनी में कमी आई है क्योंकि पहले SMS पैक बहुत बड़ी मात्रा में बिकते थे और त्योहारों पर तो हर मेसेज का 2 रुपया तक वसूला जाता था. इसी तरह का घाटा उनको मुफ्त वीडियो चैट के कारण हो रहा है क्योंकि पहले इंटरनेशनल कालिंग से अच्छी खासी कमाई इन कंपनियों के होती थी.
भारत में नेट न्यूट्रैलिटी के नियम क्या है?
भारत में नेट न्यूट्रैलिटी लागू है और यहाँ पर सभी यूजर्स को एक समान स्पीड से नेट की सेवा उपलब्ध है. हालाँकि भारत में टेलीकॉम कम्पनियाँ सरकार पर नेट न्यूट्रैलिटी को ख़त्म करने का दबाव बनाने की कोशिश कर रहीं हैं. भारत सरकार का तर्क है कि अभी हमारे देश में लगभग 40 करोड़ लोगों तक ही इन्टरनेट की पहुँच हो पाई है इसे और बढ़ाने के लिए नेट न्यूट्रैलिटी की जरूरत है. ज्ञातव्य है कि हाल ही में अमेरिका में ट्रम्प सरकार ने नेट न्यूट्रैलिटी को ख़त्म कर दिया है.
उम्मीद की जाती है कि ऊपर लिखे गए लेख को पढने के बाद आप समझ गए होंगे की न्यूट्रैलिटी लागू का क्या मतलब होता है और इन्टरनेट की दुनिया में इसका कितना महत्वपूर्ण स्थान है.

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