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पेशवा की सूची

मराठा राज्य में वफादार मंत्रियों को विभिन्न प्रशासनिक एव राजा के साथ ही राजनीतिक मामलों की सहायता के लिए नियुक्त किए गए थे उन्हे पेशवा बोला जाता है। यहाँ, हम एक पेशवाओं की सूची आप मराठा शासन के दौरान पेशवाओं के कालक्रम को समझने में मदद मिलेगी ।
Jul 13, 2016 16:32 IST
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मराठा राज्य में वफादार मंत्रियों को विभिन्न प्रशासनिक एव राजा के साथ ही राजनीतिक मामलों की सहायता के लिए नियुक्त किए गए थे उन्हे पेशवा बोला जाता है। यहाँ हम " पेशवाओं की सूची" दे रहे हैं जिससे मराठा शासन के दौरान पेशवाओं की  नियुक्ति और उनके कालक्रम को समझने में मदद मिलेगी।

नाम

विवरण

शासनकाल शुरू किया (AD)

शासनकाल खत्‍म हुआ  (AD)

बालाजी विश्‍वनाथ

1719 में मुगल सम्राट फारूखशियार की गवाही में सैयद ब्रदर्स की मदद की |

17 नवंबर 1713

12 अप्रैल 1720

बाजीराव I

मध्य भारत (मालवा) और राजपूताना को जीत में मदद की और उत्तर-पश्चिम में गुजरात और और दक्षिण में डेक्कन में अपना उपनिवेश बढ़ाया | 1738 में मुगल दिल्ली पे  छापा मारा| वह सबसे शक्तिशाली पेशवा था|  यहां बाजीराव प्रथम के बारे कुछ उद्धरणों का उल्‍लेख हैं –

"वह जैसे जीता था वैसे ही इसकी मौत हुई| इसकी मृत्‍यु अपने लोगों के बीच टैंट में रहते हुए हुई थी| आज भी इन्‍हें मराठी पेशवाओं में एक योद्धा और हिंदू शक्ति के रूप में याद किया जाता है|” — सर रिचर्ड कारनैक टेंपल, शिवाजी एंड द राइज ऑफ द मराठा

“पेशवाओं के लंबे और प्रतिष्ठित आकाशगंगा में  बाजीराव पैदाइशी घुड़सवार और सेनापति थे| बाजीराव के साहस, प्रतिभा और उसूलों के समान कोई नहीं था|” — सर जादुनाथ सरकार, वी|जी दिघे, पेशवा बाजीराव I एंड मराठा एक्‍सपेंशन

12 अप्रैल  1720

28  अप्रैल  1740

बालाजी बाजीराव

मराठा शासित प्रदेशों का उत्तर-पश्चिम, पूर्व और मध्य भारत के अधिकांश क्षेत्रों में विस्तार करने में कामयाब रहे| 1761 में पानीपत की तीसरी लड़ाई हार गए|

28  अप्रैल  1740

23  अप्रैल  1761

माघव राव I

आंतरिक मतभेदों और युद्ध में निजाम के साथ सफलता पूर्वक लड़े|

23 जून 1761

18 नवबंर 1772

नारायन-राव

गार्डी गार्ड्स को मारा

18 नवंबर 1772

30 अगस्‍त 1773

रघुनाथ-राव

उत्तर-पश्चिम में पेशावर तक साम्राज्य का विस्तार और उत्तर भारत में मराठा शक्ति की गिरावट के लिए भी जिम्मेदार| नाना फडणीस और 11 अन्य प्रशासकों द्वारा अपदस्थ जिसे अब "बारभाई साजिश" कहा जाता है|

1773

1774

माघव-राव II

नाना फडणीस के राजनीतिक षड्यंत्र का बोलबाला| उत्तर भारत में मराठा शक्ति के पुनरुत्थान में दिखे|

1774

27 अक्‍तूबर  1795

बाजीराव II

पहला शासनकाल - पूना की लड़ाई में, यशवंतराव होलकर इंदौर के शासक से हार गया था| ब्रिटिश सुरक्षा के लिए भाग गए, और दिसंबर 1802 में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के साथ वसई की संधि निष्कर्ष निकाली, एक सहायक बल के रखरखाव के लिए राज्य क्षेत्र छोड़ा और बिना अन्य शक्ति के साथ संधि करने के लिए सहमत| इसकी वजह से दूसरा एंग्लो-मराठा युद्ध छिड़ा| यहा से महासंघ का पतन शुरू हुआ|

1796

1802

दूसरा शासनकाल - दूसरे शासनकाल के दौरान तीसरा एंग्लो-मराठा युद्ध शुरू हुआ| जनवरी 1818 में कोरेगांव की लड़ाई में हार के बाद वे अंग्रेजों से बचकर भाग रहे थे| आखिरकार, सतारा से मराठा के राजा प्रताप सिंह को पकड़कर जबरन अंग्रेजों ने उसकी प्रभुता पदभार को अपने पक्ष में घोष्ज्ञित करवा लिया| और इससे मराठा महासंघ के प्रमुख के रूप में पेशवा का कानूनी हक समाप्त हो गया| 3 जून 1818 को बाजीराव ने अंग्रेजों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया; इन्‍हें  कानपुर के पास बिथुर में बंधी बना लिया गया|

1803

1818

नाना साहिब

1857 के भारतीय विद्रोह के दौरान एक नेता के रूप में निर्वासित, मराठा पेशवा बाजीराव द्वितीय के दत्तक पुत्र, इन्‍होंने मराठा महासंघ और पेशवा परंपरा को बहाल करने की मांग की थी |

1851

1857

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