Search

जाने नए नोट छापने के लक्ष्य को प्राप्त करने में कितना समय लगेगा?

विमुद्रीकरण के बाद अब एक महीने से अधिक समय हो गया है, लेकिन ATM और बैंको में अभी भी कतारें देखने को मिल रही है| पिछले एक महीने से तेजी से नए नोटों की प्रिंटिंग हो रही है और उसे बैंकों एवं ATM तक पहुँचाने के लिए यथासंभव प्रयास किए जा रहे हैं| लेकिन क्या 50 दिनों में नए नोट छापने के लक्ष्य को पूरा किया जा सकता है? इस लेख में हम इसी प्रश्न का उत्तर ढूंढने की कोशिश कर रहे हैं|
Dec 16, 2016 17:54 IST
facebook Iconfacebook Iconfacebook Icon

विमुद्रीकरण के बाद अब एक महीने से अधिक समय हो गया है, लेकिन ATM और बैंको में अभी भी कतारें देखने को मिल रही है|नोटबंदी की घोषणा करते समय प्रधानमंत्री ने लोगों से वादा किया था कि स्थिति सामान्य होने में 50 दिन का समय लगेगा| प्रधानमंत्री द्वारा किए गए वादे को पूरा करने के लिए सरकारी अधिकारी, RBI और बैंकिंग कर्मचारी पूरी क्षमता के साथ काम कर रहे हैं| पिछले एक महीने से तेजी से नए नोटों की प्रिंटिंग हो रही है और उसे बैंकों एवं ATM तक पहुँचाने के लिए यथासंभव प्रयास किए जा रहे हैं| लेकिन क्या 50 दिनों में नए नोट छापने के लक्ष्य को पूरा किया जा सकता है? इस लेख में हम इसी प्रश्न का उत्तर ढूंढने की कोशिश कर रहे हैं|

आइए सबसे पहले जानते हैं कि भारत में किन-किन स्थानों पर नोट छपते हैं?

1. नासिक (महाराष्ट्र)
2. देवास (मध्य प्रदेश)
3. सालबोनी (पश्चिम बंगाल)
4. मैसूर (कर्नाटक)

आइए जाने नए नोट छापने के लक्ष्य को प्राप्त करने में प्रिंटिंग प्रेस को कितना समय लगेगा?

Jagranjosh

सभी प्रिंटिंग प्रेस द्वारा पूरी मुद्रण क्षमता (3 शिफ्ट में काम करने पर) का उपयोग करने पर

1. यदि भारत में नोट छापने वाले चारों प्रिंटिंग प्रेस अपनी पूरी क्षमता अर्थात 3 शिफ्ट में काम करते हुए 500 और 2000 रूपए के नोट समान मात्रा (50% 500 रूपए के नोट, 50% 2000 रूपए के नोट) में छापते हैं तो निर्धारित लक्ष्य प्राप्त करने में 95 दिन अर्थात 3 महीने से अधिक समय लगेंगे|   
2. यदि भारत में नोट छापने वाले चारों प्रिंटिंग प्रेस अपनी पूरी क्षमता अर्थात 3 शिफ्ट में काम करते हुए 500 और 2000 रूपए के समान मूल्य वाले नोट (80% 500 रूपए के नोट, 20% 2000 रूपए के नोट) छापते हैं तो निर्धारित लक्ष्य प्राप्त करने में 149 दिन अर्थात लगभग 5 महीने लगेंगे|

सभी प्रिंटिंग प्रेस द्वारा मौजूदा मुद्रण क्षमता (2 शिफ्ट में काम करने पर) का उपयोग करने पर

1. यदि भारत में नोट छापने वाले चारों प्रिंटिंग प्रेस अपनी मौजूदा क्षमता अर्थात 2 शिफ्ट में काम करते हुए 500 और 2000 रूपए के नोट समान मात्रा (50% 500 रूपए के नोट, 50% 2000 रूपए के नोट) में छापते हैं तो निर्धारित लक्ष्य प्राप्त करने में 295 दिन अर्थात 9 महीने से अधिक समय लगेंगे|
2. यदि भारत में नोट छापने वाले चारों प्रिंटिंग प्रेस अपनी मौजूदा क्षमता अर्थात 2 शिफ्ट में काम करते हुए 500 और 2000 रूपए के समान मूल्य वाले नोट (80% 500 रूपए के नोट, 20% 2000 रूपए के नोट) छापते हैं तो निर्धारित लक्ष्य प्राप्त करने में 461 दिन अर्थात 15 महीने से अधिक समय लगेंगे|

जानें 500/1000 के नोट बंद होने पर आम जनता को होने वाले सीधे फायदे और नुकसान

आइए अब जानते हैं कि भारत के प्रिंटिंग प्रेसों की प्रिंटिंग क्षमता क्या है और ये किसके स्वामित्व में हैं?

भारत में करेन्सी नोट की छपाई करने वाले चार प्रिंटिंग प्रेस में से दो भारत सरकार के स्वामित्व में है और दो भारतीय रिजर्व बैंक के स्वामित्व में है| 
भारत सरकार के स्वामित्व वाले प्रिंटिग प्रेस

1. नासिक (महाराष्ट्र)
2. देवास (मध्यप्रदेश)

ये दोनों प्रेस सिक्यूरिटी प्रिंटिंग एंड मिंटिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (SPMCIL) के माध्यम से केन्द्र सरकार के स्वामित्व में है| वित्त मंत्रालय के नवीनतम वार्षिक रिपोर्ट में उपलब्ध जानकारी के अनुसार इन दो प्रिंटिंग प्रेस की नोट छापने की वार्षिक क्षमता देश के कुल नोट का लगभग 40 प्रतिशत है| 

भारतीय रिजर्व बैंक के स्वामित्व वाले प्रिंटिग प्रेस

1. सालबोनी (पश्चिम बंगाल)
2. मैसूर (कर्नाटक)
सालबोनी और मैसूर में स्थित ये दो प्रेस भारतीय रिजर्व बैंक नोट मुद्रण प्राइवेट लिमिटेड (BRBNMPL) का हिस्सा हैं जो भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की पूर्ण स्वामित्व वाली एक सहायक संस्था है| भारतीय रिजर्व बैंक नोट मुद्रण प्राइवेट लिमिटेड (BRBNMPL) की वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार इन दो प्रिंटिंग प्रेस की नोट छापने की वार्षिक क्षमता देश के कुल नोट का लगभग 60 प्रतिशत है अर्थात ये दोनों प्रेस मिलकर प्रति वर्ष दो शिफ्टों में काम करते हुए 16 अरब नोट छाप सकते हैं|

देवास स्थित प्रिंटिंग प्रेस में एक साल में 265 करोड़ नोट छपते हैं। यहाँ पर 20, 50, 100, 500 रूपए मूल्य के नोट छपते हैं| मजेदार बात यह है कि देवास में ही नोटों में प्रयोग होने वाली स्याही का उत्पादन भी किया जाता है| नासिक स्थित प्रिंटिंग प्रेस में सन 1991 से लेकर अब तक 1, 2, 5 10, 50 और 100 के नोट छापे जाते हैं| नए 2000 रूपए के नोट की छपाई मैसूर और सालबोनी स्थित प्रिंटिंग प्रेस में की जा रही है जबकि 500 रूपए के नोट की छपाई नासिक और देवास प्रिंटिंग प्रेस में की जा रही है|

अंत में यह जानने की कोशिश करते हैं कि कैसे करेन्सी नोट प्रिंटिंग प्रेस से ATM तक पहुँचते है?

प्रिंटिंग प्रेस से ATM तक करेन्सी नोट पहुँचाने की प्रक्रिया पाँच चरणों में संपन्न होती है|

1. प्रिंटिंग प्रेस
जैसा कि हम पहले बता चुके हैं कि वर्तमान में 2000 रूपए के नोट की प्रिंटिंग मैसूर और सालबोनी स्थित प्रिंटिंग प्रेस में की जा रही है और 500 रूपए के नोट की प्रिंटिंग नासिक और देवास प्रिंटिंग प्रेस में की जा रही है|

2. RBI के कार्यालय
प्रिंटिंग होने के बाद नोट को देश भर के 19 शहरों में फैले भारतीय रिजर्व बैंक के कार्यालयों में भेजा जाता है|

3. मुद्रा भंडारगृह (करेन्सी चेस्ट)
RBI के कार्यालयों से पैसा उच्च सुरक्षा वाले वैन के द्वारा देश भर में स्थित चार हजार से अधिक करेंसी चेस्ट में ले जाया जाता है। करेंसी चेस्ट का संचालन विभिन्न बैंकों द्वारा किया जा रहा है|

4. बैंकों की शाखाएं
करेंसी चेस्ट में पैसे आने के बाद इसे सभी बैंक अपनी शाखाओं में भेजती है|

5. ATM
बैंकों की शाखाओं में पैसे आने के बाद इसे नजदीकी ATM में भेजा जाता है|

भारत में रुपया कैसे, कहां बनता है और उसको कैसे नष्ट किया जाता है?