पब्लिक सेक्टर बैंक Vs प्राइवेट सेक्टर बैंक: कौन-सा बेहतर विकल्प है ?

Mar 28, 2018, 11:49 IST

सार्वजनिक क्षेत्र की बैंक नौकरियां कई पहलुओं में निजी क्षेत्र के बैंक की नौकरियों की तुलना में बेहतर हैं। यहाँ हम दोनों क्षेत्र की नौकरियो के सकारात्मक और नकारात्मक पहलुओ के बारे में चर्चा कर रहे है।

Public or Private : which bank job should you go for?
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बैंकिंग क्षेत्र में कैरियर, सरकारी नौकरी की इच्छा रखने वाले उम्मीदवारों के बीच हमेशा से एक सदाबहार विकल्प रहा है। IBPS, SBI, RBI इत्यादि परीक्षा बोर्ड की व्यापक और कठिन स्क्रीनिंग प्रक्रिया के बावजूद, हर साल हजारों उम्मीदवार विभिन्न बैंकिंग परीक्षाओ को पास कर बैंकिंग उद्योग का हिस्सा बनते हैं। एक दुविधा, जो किसी भी बैंकिंग नौकरी की इच्छा रखने वाले उम्मीदवार को परेशान कर सकती है,वह यह है कि  एक सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक की नौकरी और एक निजी क्षेत्र के बैंक नौकरी के बीच उम्मीदवार किसका चयन करे?

सार्वजनिक क्षेत्र और निजी क्षेत्र के दोनों प्रकार के बैंक ऐसे बड़े स्तम्भ हैं, जिस पर भारत के आर्थिक विकास की नींव रखी गई है। हालांकि, जब ऑपरेशनस की बात आती है तो दोनों प्रकार के बैंक के बीच कोई बड़ा अंतर नहीं होता है। हालाकि कुछ ऐसी महत्वपूर्ण बारीकियां हैं जो SBI,जैसे सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक की नौकरी में तथा निजी क्षेत्र के बैंक जैसे HDFC या  ICICI बैंक की नौकरी में अंतर कर देती है सार्वजनिक क्षेत्र और निजी क्षेत्र के बैंकों के बीच इस अंतर को समझने से  उम्मीदवार दोनों क्षेत्रों की नौकरियो की जिम्मेदारियों और कैरियर डेवलपमेंट के मार्ग का मूल्यांकन स्वयं कर सकते है।

 भर्ती प्रक्रिया

इन दोनों बैंकिंग क्षेत्रों के लिए भर्ती प्रक्रिया काफी अलग-अलग है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक निजी क्षेत्र के बैंकों की तुलना में भर्ती के अधिक अवसर प्रदान करते हैं, क्योंकि वे सरकार द्वारा निर्धारित नियमों और दिशा-निर्देशों का पालन करते हैं। ज्यादातर पब्लिक सेक्टर बैंक ओपन कम्पटीशन परीक्षाओं के माध्यम से भर्ती करते हैं, जिसके लिए समाचार पत्रों, इन्टरनेट आदि में सूचनाएं विज्ञापित की जाती हैं और पात्रता मानदंडों के आधार पर सभी से आवेदन आमंत्रित किए जाते हैं। वे आरक्षित श्रेणी उम्मीदवारों के लिए सरकार द्वारा निर्धारित नियमों के अनुसार कोटा प्रणाली का भी पालन करते हैं।

आम तौर पर, निजी बैंक में भर्ती कैंपस रिक्रूटमेंट, रेफरल, वाल्क-इन इंटरव्यू आदि के माध्यम से की जाती हैं। हालांकि, बढ़ती रिक्तियों के साथ निजी बैंकों ने भी समाचार पत्रों आदि के माध्यम से ओपन कम्पटीशन परीक्षा के माध्यम से भर्ती शुरू कर दी है। इसके अलावा, प्राइवेट बैंक्स आरक्षित श्रेणी उम्मीदवारों के लिए सरकार द्वारा निर्धारित नियमों के अनुसार कोटा प्रणाली का पालन नहीं करते हैं।

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वेतनमान

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक के लिए, वेतनमान और पदोन्नति की पालिसी पहले से ही संगठनात्मक स्तर पर निर्धारित होती है। आम तौर पर, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में क्लर्कों के लिए 11765-655/3-13730-815/3-16175980/4-20095-1145/7-28110-2120/1-30230-1310/1-31540 और प्रवेश स्तर के पदों के लिए पीओ पदों के लिए 23700 - (980 x 7) - 30560 - (1145 x 2) - 32850 - (1310 x 7) – 42020 का वेतनमान है।

दूसरी तरफ, निजी बैंक, वेतनमानों के लिए इस तरह के प्रतिबंध नहीं हैं और वे व्यक्तियों की योग्यता और अनुभव के अनुसार वेतन देते हैं। एक आम धारणा भी है कि निजी क्षेत्र के बैंक MBA जैसे प्रोफेशनल डिग्री वाले लोगों को भर्ती करना पसंद करते हैं।

ट्रेनिंग एंड डेवलपमेंट

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक कर्मचारियों के प्रशिक्षण और विकास अर्थात ट्रेनिंग एंड डेवलपमेंट में बहुत समय और पैसा निवेश करते हैं। इनके प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य फोकस कर्मचारियों एक ऐसी एसेट में बदलना है जो लंबे समय तक बैंक की सेवा करे। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक फ्रेशर्स के लिए सही प्रशिक्षण की जगह हैं।

निजी क्षेत्र के बैंक भी कर्मचारियों के प्रशिक्षण पर ध्यान केंद्रित करते हैं, हालांकि वे सामान्यता ऑन-जॉब ट्रेनिंग प्रदान करते है और उनके वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा नए कर्मचारियों नौकरी की जिम्मेदारियों के विभिन्न पहलुओं में प्रशिक्षित किया जाता है। निजी क्षेत्र के बैंकों का एक और फायदा यह है कि वे अपने उच्च प्रदर्शन वाले कर्मचारियों को शीर्ष प्रबंधन संस्थानों में प्रशिक्षण के लिए भेजते रहते हैं।

कैरियर ग्रोथ

कैरियर ग्रोथ सबसे बड़ा और सबसे महत्वपूर्ण कारक है, जिसके बारे में उम्मीदवारों को बैंकिंग क्षेत्र में शामिल होने से पहले से विचार करना चाहिए।

संरचित संगठन और वरिष्ठता आधारित(seniority based) प्रमोशन पालिसी के कारण, निजी क्षेत्र के बैंकों की तुलना में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में कैरियर ग्रोथ की गति काफी धीमी है। यह कर्मचारियों के उत्साह को प्रभावित करता है, क्योंकि वे पहले से ही जानते हैं कि वे निश्चित वर्षों के बाद ही प्रमोट किया जाएगा। हालांकि बढ़ते कम्पटीशन के कारन कुछ पब्लिक सेक्टर बैंकों ने प्रतिभाशाली कर्मचारियों को रिटेन करने के लिए योग्यता पर आधारित प्रमोशन की शुरुआत की है।

दूसरी ओर, निजी क्षेत्र के बैंक किसी कर्मचारी के प्रदर्शन के आधार पर कैरियर विकास के अधिक अवसर प्रदान करते हैं। निजी क्षेत्र के बैंकों में प्रतिभा को अच्छी तरह से पुरस्कृत किया जाता है।

नौकरी की सुरक्षा

नौकरी की सुरक्षा के कारण कई उम्मीदवार सार्वजनिक क्षेत्र की बैंक की नौकरी को चुनते हैं। नौकरी की सुरक्षा एक सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक में आपके पैकेज के हिस्से के रूप में आता है, जहां एक कर्मचारी को नौकरी जिम्मेदारियों को समझने और समायोजित करने के लिए पर्याप्त समय दिया जाता है। कोई बहुत बड़ी गलती करने पर पब्लिक सेक्टर बैंक के कर्मचारी को नौकरी से निकला जा सकता है।

निजी क्षेत्र के बैंक प्रतियोगी व्यापार इकाइयां (competitive business units) हैं और लाभ के लिए काम करती हैं। इसलिए, प्रोफेशनल एटीटूड या नौकरी की ज़िम्मेदारियों में लापरवाही से आप अपनी नौकरी गवा सकते है।

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वर्क-कल्चर

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक सरकारी संस्थाए है; इसलिए उन्हें बाज़ार में बहुत प्रतिस्पर्धी (competitive) होने की ज़रूरत नहीं है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक का वर्क-कल्चर रिलैक्स्ड होता है।

दूसरी ओर, निजी क्षेत्र के बैंक लाभ मार्जिन पर काम करते हैं और इसलिए उनके कर्मचारियों को सीमित संसाधनों के साथ हाई टारगेट पूरा करना होता हैं। इन लक्ष्यों को पूरा करने के लिए प्रत्येक कर्मचारी को अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना होता है। जो निजी क्षेत्र के बैंक में वर्क-कल्चर को बहुत आक्रामक बना देता  है।

लाभ और अन्य सुविधाए

जब लाभ और भत्तों की बात आती है, तो निजी क्षेत्र के बैंकों की तुलना में सार्वजनिक क्षेत्र में निश्चित रूप से अधिक ऑफर्स होते है। पब्लिक सेक्टर बैंक के कर्मचारियों को विभिन्न सुविधाए जैसे कर्मचारी पेंशन योजना, कम ब्याज दर पर ऋण, जमा(deposits) पर उच्च ब्याज दर इत्यादि मिलती हैं।

निजी क्षेत्र के बैंक अपने कर्मचारियों को नौकरी पैकेज के हिस्से के रूप में ऐसे किसी भी लाभ या भत्तों की पेशकश नहीं करते हैं, लेकिन प्रतिभाशाली कर्मचारियों को उनके प्रदर्शन के आधार पर समय –समय पर पुरस्कृत करते रहते है।

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ट्रान्सफर

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में नौकरी लेने की योजना बना रहे ज्यादातर उम्मीदवारों के लिए शायद ट्रान्सफर सबसे बड़ी बाधा है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक शहरी महानगरों से लेकर दूर-दूर के ग्रामीण इलाको में मौजूद हैं। इसलिए, आवश्यकताओं के आधार पर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक कर्मचारी को किसी भी स्थान पर स्थानांतरित किया जा सकता है। दूसरी तरफ, निजी क्षेत्र के बैंकों में ट्रान्सफर पालिसी तय नहीं होती है और आम तौर पर विशेष शाखा में किसी विशेष भूमिका के लिए काम पर रखे गए कर्मचारी अपने पूरे कार्यकाल के दौरान वही रहते हैं।

अंत में, हम देख सकते हैं कि दोनों सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंकों में नौकरी करने के फायदे और नुकसान हैं। यह उम्मीदवारों पर निर्भर है कि वे किस क्षेत्र में अपना कैरियर कैरियर बनाना चाहते हैं।

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बैंकिंग क्षेत्र में कैरियर, सरकारी नौकरी की इच्छा रखने वाले उम्मीदवारों के बीच हमेशा से एक सदाबहार विकल्प रहा है। IBPS, SBI, RBI इत्यादि परीक्षा बोर्ड की व्यापक और कठिन स्क्रीनिंग प्रक्रिया के बावजूद, हर साल हजारों उम्मीदवार विभिन्न बैंकिंग परीक्षाओ को पास कर बैंकिंग उद्योग का हिस्सा बनते हैं। एक दुविधा, जो किसी भी बैंकिंग नौकरी की इच्छा रखने वाले उम्मीदवार को परेशान कर सकती है,वह यह है कि  एक सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक की नौकरी और एक निजी क्षेत्र के बैंक नौकरी के बीच उम्मीदवार किसका चयन करे?

सार्वजनिक क्षेत्र और निजी क्षेत्र के दोनों प्रकार के बैंक ऐसे बड़े स्तम्भ हैं, जिस पर भारत के आर्थिक विकास की नींव रखी गई है। हालांकि, जब ऑपरेशनस की बात आती है तो दोनों प्रकार के बैंक के बीच कोई बड़ा अंतर नहीं होता है। हालाकि कुछ ऐसी महत्वपूर्ण बारीकियां हैं जो SBI,जैसे सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक की नौकरी में तथा निजी क्षेत्र के बैंक जैसे HDFC या  ICICI बैंक की नौकरी में अंतर कर देती है सार्वजनिक क्षेत्र और निजी क्षेत्र के बैंकों के बीच इस अंतर को समझने से  उम्मीदवार दोनों क्षेत्रों की नौकरियो की जिम्मेदारियों और कैरियर डेवलपमेंट के मार्ग का मूल्यांकन स्वयं कर सकते है।

 भर्ती प्रक्रिया

इन दोनों बैंकिंग क्षेत्रों के लिए भर्ती प्रक्रिया काफी अलग-अलग है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक निजी क्षेत्र के बैंकों की तुलना में भर्ती के अधिक अवसर प्रदान करते हैं, क्योंकि वे सरकार द्वारा निर्धारित नियमों और दिशा-निर्देशों का पालन करते हैं। ज्यादातर पब्लिक सेक्टर बैंक ओपन कम्पटीशन परीक्षाओं के माध्यम से भर्ती करते हैं, जिसके लिए समाचार पत्रों, इन्टरनेट आदि में सूचनाएं विज्ञापित की जाती हैं और पात्रता मानदंडों के आधार पर सभी से आवेदन आमंत्रित किए जाते हैं। वे आरक्षित श्रेणी उम्मीदवारों के लिए सरकार द्वारा निर्धारित नियमों के अनुसार कोटा प्रणाली का भी पालन करते हैं।

आम तौर पर, निजी बैंक में भर्ती कैंपस रिक्रूटमेंट, रेफरल, वाल्क-इन इंटरव्यू आदि के माध्यम से की जाती हैं। हालांकि, बढ़ती रिक्तियों के साथ निजी बैंकों ने भी समाचार पत्रों आदि के माध्यम से ओपन कम्पटीशन परीक्षा के माध्यम से भर्ती शुरू कर दी है। इसके अलावा, प्राइवेट बैंक्स आरक्षित श्रेणी उम्मीदवारों के लिए सरकार द्वारा निर्धारित नियमों के अनुसार कोटा प्रणाली का पालन नहीं करते हैं।

 

 

वेतनमान

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक के लिए, वेतनमान और पदोन्नति की पालिसी पहले से ही संगठनात्मक स्तर पर निर्धारित होती है। आम तौर पर, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में क्लर्कों के लिए 11765-655/3-13730-815/3-16175980/4-20095-1145/7-28110-2120/1-30230-1310/1-31540 और प्रवेश स्तर के पदों के लिए पीओ पदों के लिए 23700 - (980 x 7) - 30560 - (1145 x 2) - 32850 - (1310 x 7) – 42020 का वेतनमान है।

दूसरी तरफ, निजी बैंक, वेतनमानों के लिए इस तरह के प्रतिबंध नहीं हैं और वे व्यक्तियों की योग्यता और अनुभव के अनुसार वेतन देते हैं। एक आम धारणा भी है कि निजी क्षेत्र के बैंक MBA जैसे प्रोफेशनल डिग्री वाले लोगों को भर्ती करना पसंद करते हैं।

ट्रेनिंग एंड डेवलपमेंट

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक कर्मचारियों के प्रशिक्षण और विकास अर्थात ट्रेनिंग एंड डेवलपमेंट में बहुत समय और पैसा निवेश करते हैं। इनके प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य फोकस कर्मचारियों एक ऐसी एसेट में बदलना है जो लंबे समय तक बैंक की सेवा करे। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक फ्रेशर्स के लिए सही प्रशिक्षण की जगह हैं।

निजी क्षेत्र के बैंक भी कर्मचारियों के प्रशिक्षण पर ध्यान केंद्रित करते हैं, हालांकि वे सामान्यता ऑन-जॉब ट्रेनिंग प्रदान करते है और उनके वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा नए कर्मचारियों नौकरी की जिम्मेदारियों के विभिन्न पहलुओं में प्रशिक्षित किया जाता है। निजी क्षेत्र के बैंकों का एक और फायदा यह है कि वे अपने उच्च प्रदर्शन वाले कर्मचारियों को शीर्ष प्रबंधन संस्थानों में प्रशिक्षण के लिए भेजते रहते हैं।

कैरियर ग्रोथ

कैरियर ग्रोथ सबसे बड़ा और सबसे महत्वपूर्ण कारक है, जिसके बारे में उम्मीदवारों को बैंकिंग क्षेत्र में शामिल होने से पहले से विचार करना चाहिए।

संरचित संगठन और वरिष्ठता आधारित(seniority based) प्रमोशन पालिसी के कारण, निजी क्षेत्र के बैंकों की तुलना में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में कैरियर ग्रोथ की गति काफी धीमी है। यह कर्मचारियों के उत्साह को प्रभावित करता है, क्योंकि वे पहले से ही जानते हैं कि वे निश्चित वर्षों के बाद ही प्रमोट किया जाएगा। हालांकि बढ़ते कम्पटीशन के कारन कुछ पब्लिक सेक्टर बैंकों ने प्रतिभाशाली कर्मचारियों को रिटेन करने के लिए योग्यता पर आधारित प्रमोशन की शुरुआत की है।

 

दूसरी ओर, निजी क्षेत्र के बैंक किसी कर्मचारी के प्रदर्शन के आधार पर कैरियर विकास के अधिक अवसर प्रदान करते हैं। निजी क्षेत्र के बैंकों में प्रतिभा को अच्छी तरह से पुरस्कृत किया जाता है।

नौकरी की सुरक्षा

नौकरी की सुरक्षा के कारण कई उम्मीदवार सार्वजनिक क्षेत्र की बैंक की नौकरी को चुनते हैं। नौकरी की सुरक्षा एक सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक में आपके पैकेज के हिस्से के रूप में आता है, जहां एक कर्मचारी को नौकरी जिम्मेदारियों को समझने और समायोजित करने के लिए पर्याप्त समय दिया जाता है। कोई बहुत बड़ी गलती करने पर पब्लिक सेक्टर बैंक के कर्मचारी को नौकरी से निकला जा सकता है।

निजी क्षेत्र के बैंक प्रतियोगी व्यापार इकाइयां (competitive business units) हैं और लाभ के लिए काम करती हैं। इसलिए, प्रोफेशनल एटीटूड या नौकरी की ज़िम्मेदारियों में लापरवाही से आप अपनी नौकरी गवा सकते है।

वर्क-कल्चर

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक सरकारी संस्थाए है; इसलिए उन्हें बाज़ार में बहुत प्रतिस्पर्धी (competitive) होने की ज़रूरत नहीं है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक का वर्क-कल्चर रिलैक्स्ड होता है।

दूसरी ओर, निजी क्षेत्र के बैंक लाभ मार्जिन पर काम करते हैं और इसलिए उनके कर्मचारियों को सीमित संसाधनों के साथ हाई टारगेट पूरा करना होता हैं। इन लक्ष्यों को पूरा करने के लिए प्रत्येक कर्मचारी को अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना होता है। जो निजी क्षेत्र के बैंक में वर्क-कल्चर को बहुत आक्रामक बना देता  है।

लाभ और अन्य सुविधाए

जब लाभ और भत्तों की बात आती है, तो निजी क्षेत्र के बैंकों की तुलना में सार्वजनिक क्षेत्र में निश्चित रूप से अधिक ऑफर्स होते है। पब्लिक सेक्टर बैंक के कर्मचारियों को विभिन्न सुविधाए जैसे कर्मचारी पेंशन योजना, कम ब्याज दर पर ऋण, जमा(deposits) पर उच्च ब्याज दर इत्यादि मिलती हैं।

निजी क्षेत्र के बैंक अपने कर्मचारियों को नौकरी पैकेज के हिस्से के रूप में ऐसे किसी भी लाभ या भत्तों की पेशकश नहीं करते हैं, लेकिन प्रतिभाशाली कर्मचारियों को उनके प्रदर्शन के आधार पर समय –समय पर पुरस्कृत करते रहते है।

ट्रान्सफर

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में नौकरी लेने की योजना बना रहे ज्यादातर उम्मीदवारों के लिए शायद ट्रान्सफर सबसे बड़ी बाधा है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक शहरी महानगरों से लेकर दूर-दूर के ग्रामीण इलाको में मौजूद हैं। इसलिए, आवश्यकताओं के आधार पर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक कर्मचारी को किसी भी स्थान पर स्थानांतरित किया जा सकता है। दूसरी तरफ, निजी क्षेत्र के बैंकों में ट्रान्सफर पालिसी तय नहीं होती है और आम तौर पर विशेष शाखा में किसी विशेष भूमिका के लिए काम पर रखे गए कर्मचारी अपने पूरे कार्यकाल के दौरान वही रहते हैं।

अंत में, हम देख सकते हैं कि दोनों सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंकों में नौकरी करने के फायदे और नुकसान हैं। यह उम्मीदवारों पर निर्भर है कि वे किस क्षेत्र में अपना कैरियर कैरियर बनाना चाहते हैं।

बैंकिंग क्षेत्र में कैरियर, सरकारी नौकरी की इच्छा रखने वाले उम्मीदवारों के बीच हमेशा से एक सदाबहार विकल्प रहा है। IBPS, SBI, RBI इत्यादि परीक्षा बोर्ड की व्यापक और कठिन स्क्रीनिंग प्रक्रिया के बावजूद, हर साल हजारों उम्मीदवार विभिन्न बैंकिंग परीक्षाओ को पास कर बैंकिंग उद्योग का हिस्सा बनते हैं। एक दुविधा, जो किसी भी बैंकिंग नौकरी की इच्छा रखने वाले उम्मीदवार को परेशान कर सकती है,वह यह है कि  एक सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक की नौकरी और एक निजी क्षेत्र के बैंक नौकरी के बीच उम्मीदवार किसका चयन करे?

सार्वजनिक क्षेत्र और निजी क्षेत्र के दोनों प्रकार के बैंक ऐसे बड़े स्तम्भ हैं, जिस पर भारत के आर्थिक विकास की नींव रखी गई है। हालांकि, जब ऑपरेशनस की बात आती है तो दोनों प्रकार के बैंक के बीच कोई बड़ा अंतर नहीं होता है। हालाकि कुछ ऐसी महत्वपूर्ण बारीकियां हैं जो SBI,जैसे सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक की नौकरी में तथा निजी क्षेत्र के बैंक जैसे HDFC या  ICICI बैंक की नौकरी में अंतर कर देती है सार्वजनिक क्षेत्र और निजी क्षेत्र के बैंकों के बीच इस अंतर को समझने से  उम्मीदवार दोनों क्षेत्रों की नौकरियो की जिम्मेदारियों और कैरियर डेवलपमेंट के मार्ग का मूल्यांकन स्वयं कर सकते है।

 भर्ती प्रक्रिया

इन दोनों बैंकिंग क्षेत्रों के लिए भर्ती प्रक्रिया काफी अलग-अलग है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक निजी क्षेत्र के बैंकों की तुलना में भर्ती के अधिक अवसर प्रदान करते हैं, क्योंकि वे सरकार द्वारा निर्धारित नियमों और दिशा-निर्देशों का पालन करते हैं। ज्यादातर पब्लिक सेक्टर बैंक ओपन कम्पटीशन परीक्षाओं के माध्यम से भर्ती करते हैं, जिसके लिए समाचार पत्रों, इन्टरनेट आदि में सूचनाएं विज्ञापित की जाती हैं और पात्रता मानदंडों के आधार पर सभी से आवेदन आमंत्रित किए जाते हैं। वे आरक्षित श्रेणी उम्मीदवारों के लिए सरकार द्वारा निर्धारित नियमों के अनुसार कोटा प्रणाली का भी पालन करते हैं।

आम तौर पर, निजी बैंक में भर्ती कैंपस रिक्रूटमेंट, रेफरल, वाल्क-इन इंटरव्यू आदि के माध्यम से की जाती हैं। हालांकि, बढ़ती रिक्तियों के साथ निजी बैंकों ने भी समाचार पत्रों आदि के माध्यम से ओपन कम्पटीशन परीक्षा के माध्यम से भर्ती शुरू कर दी है। इसके अलावा, प्राइवेट बैंक्स आरक्षित श्रेणी उम्मीदवारों के लिए सरकार द्वारा निर्धारित नियमों के अनुसार कोटा प्रणाली का पालन नहीं करते हैं।

 

 

वेतनमान

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक के लिए, वेतनमान और पदोन्नति की पालिसी पहले से ही संगठनात्मक स्तर पर निर्धारित होती है। आम तौर पर, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में क्लर्कों के लिए 11765-655/3-13730-815/3-16175980/4-20095-1145/7-28110-2120/1-30230-1310/1-31540 और प्रवेश स्तर के पदों के लिए पीओ पदों के लिए 23700 - (980 x 7) - 30560 - (1145 x 2) - 32850 - (1310 x 7) – 42020 का वेतनमान है।

दूसरी तरफ, निजी बैंक, वेतनमानों के लिए इस तरह के प्रतिबंध नहीं हैं और वे व्यक्तियों की योग्यता और अनुभव के अनुसार वेतन देते हैं। एक आम धारणा भी है कि निजी क्षेत्र के बैंक MBA जैसे प्रोफेशनल डिग्री वाले लोगों को भर्ती करना पसंद करते हैं।

ट्रेनिंग एंड डेवलपमेंट

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक कर्मचारियों के प्रशिक्षण और विकास अर्थात ट्रेनिंग एंड डेवलपमेंट में बहुत समय और पैसा निवेश करते हैं। इनके प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य फोकस कर्मचारियों एक ऐसी एसेट में बदलना है जो लंबे समय तक बैंक की सेवा करे। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक फ्रेशर्स के लिए सही प्रशिक्षण की जगह हैं।

निजी क्षेत्र के बैंक भी कर्मचारियों के प्रशिक्षण पर ध्यान केंद्रित करते हैं, हालांकि वे सामान्यता ऑन-जॉब ट्रेनिंग प्रदान करते है और उनके वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा नए कर्मचारियों नौकरी की जिम्मेदारियों के विभिन्न पहलुओं में प्रशिक्षित किया जाता है। निजी क्षेत्र के बैंकों का एक और फायदा यह है कि वे अपने उच्च प्रदर्शन वाले कर्मचारियों को शीर्ष प्रबंधन संस्थानों में प्रशिक्षण के लिए भेजते रहते हैं।

कैरियर ग्रोथ

कैरियर ग्रोथ सबसे बड़ा और सबसे महत्वपूर्ण कारक है, जिसके बारे में उम्मीदवारों को बैंकिंग क्षेत्र में शामिल होने से पहले से विचार करना चाहिए।

संरचित संगठन और वरिष्ठता आधारित(seniority based) प्रमोशन पालिसी के कारण, निजी क्षेत्र के बैंकों की तुलना में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में कैरियर ग्रोथ की गति काफी धीमी है। यह कर्मचारियों के उत्साह को प्रभावित करता है, क्योंकि वे पहले से ही जानते हैं कि वे निश्चित वर्षों के बाद ही प्रमोट किया जाएगा। हालांकि बढ़ते कम्पटीशन के कारन कुछ पब्लिक सेक्टर बैंकों ने प्रतिभाशाली कर्मचारियों को रिटेन करने के लिए योग्यता पर आधारित प्रमोशन की शुरुआत की है।

 

दूसरी ओर, निजी क्षेत्र के बैंक किसी कर्मचारी के प्रदर्शन के आधार पर कैरियर विकास के अधिक अवसर प्रदान करते हैं। निजी क्षेत्र के बैंकों में प्रतिभा को अच्छी तरह से पुरस्कृत किया जाता है।

नौकरी की सुरक्षा

नौकरी की सुरक्षा के कारण कई उम्मीदवार सार्वजनिक क्षेत्र की बैंक की नौकरी को चुनते हैं। नौकरी की सुरक्षा एक सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक में आपके पैकेज के हिस्से के रूप में आता है, जहां एक कर्मचारी को नौकरी जिम्मेदारियों को समझने और समायोजित करने के लिए पर्याप्त समय दिया जाता है। कोई बहुत बड़ी गलती करने पर पब्लिक सेक्टर बैंक के कर्मचारी को नौकरी से निकला जा सकता है।

निजी क्षेत्र के बैंक प्रतियोगी व्यापार इकाइयां (competitive business units) हैं और लाभ के लिए काम करती हैं। इसलिए, प्रोफेशनल एटीटूड या नौकरी की ज़िम्मेदारियों में लापरवाही से आप अपनी नौकरी गवा सकते है।

वर्क-कल्चर

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक सरकारी संस्थाए है; इसलिए उन्हें बाज़ार में बहुत प्रतिस्पर्धी (competitive) होने की ज़रूरत नहीं है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक का वर्क-कल्चर रिलैक्स्ड होता है।

दूसरी ओर, निजी क्षेत्र के बैंक लाभ मार्जिन पर काम करते हैं और इसलिए उनके कर्मचारियों को सीमित संसाधनों के साथ हाई टारगेट पूरा करना होता हैं। इन लक्ष्यों को पूरा करने के लिए प्रत्येक कर्मचारी को अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना होता है। जो निजी क्षेत्र के बैंक में वर्क-कल्चर को बहुत आक्रामक बना देता  है।

लाभ और अन्य सुविधाए

जब लाभ और भत्तों की बात आती है, तो निजी क्षेत्र के बैंकों की तुलना में सार्वजनिक क्षेत्र में निश्चित रूप से अधिक ऑफर्स होते है। पब्लिक सेक्टर बैंक के कर्मचारियों को विभिन्न सुविधाए जैसे कर्मचारी पेंशन योजना, कम ब्याज दर पर ऋण, जमा(deposits) पर उच्च ब्याज दर इत्यादि मिलती हैं।

निजी क्षेत्र के बैंक अपने कर्मचारियों को नौकरी पैकेज के हिस्से के रूप में ऐसे किसी भी लाभ या भत्तों की पेशकश नहीं करते हैं, लेकिन प्रतिभाशाली कर्मचारियों को उनके प्रदर्शन के आधार पर समय –समय पर पुरस्कृत करते रहते है।

ट्रान्सफर

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में नौकरी लेने की योजना बना रहे ज्यादातर उम्मीदवारों के लिए शायद ट्रान्सफर सबसे बड़ी बाधा है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक शहरी महानगरों से लेकर दूर-दूर के ग्रामीण इलाको में मौजूद हैं। इसलिए, आवश्यकताओं के आधार पर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक कर्मचारी को किसी भी स्थान पर स्थानांतरित किया जा सकता है। दूसरी तरफ, निजी क्षेत्र के बैंकों में ट्रान्सफर पालिसी तय नहीं होती है और आम तौर पर विशेष शाखा में किसी विशेष भूमिका के लिए काम पर रखे गए कर्मचारी अपने पूरे कार्यकाल के दौरान वही रहते हैं।

अंत में, हम देख सकते हैं कि दोनों सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंकों में नौकरी करने के फायदे और नुकसान हैं। यह उम्मीदवारों पर निर्भर है कि वे किस क्षेत्र में अपना कैरियर कैरियर बनाना चाहते हैं।

बैंकिंग क्षेत्र में कैरियर, सरकारी नौकरी की इच्छा रखने वाले उम्मीदवारों के बीच हमेशा से एक सदाबहार विकल्प रहा है। IBPS, SBI, RBI इत्यादि परीक्षा बोर्ड की व्यापक और कठिन स्क्रीनिंग प्रक्रिया के बावजूद, हर साल हजारों उम्मीदवार विभिन्न बैंकिंग परीक्षाओ को पास कर बैंकिंग उद्योग का हिस्सा बनते हैं। एक दुविधा, जो किसी भी बैंकिंग नौकरी की इच्छा रखने वाले उम्मीदवार को परेशान कर सकती है,वह यह है कि  एक सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक की नौकरी और एक निजी क्षेत्र के बैंक नौकरी के बीच उम्मीदवार किसका चयन करे?

सार्वजनिक क्षेत्र और निजी क्षेत्र के दोनों प्रकार के बैंक ऐसे बड़े स्तम्भ हैं, जिस पर भारत के आर्थिक विकास की नींव रखी गई है। हालांकि, जब ऑपरेशनस की बात आती है तो दोनों प्रकार के बैंक के बीच कोई बड़ा अंतर नहीं होता है। हालाकि कुछ ऐसी महत्वपूर्ण बारीकियां हैं जो SBI,जैसे सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक की नौकरी में तथा निजी क्षेत्र के बैंक जैसे HDFC या  ICICI बैंक की नौकरी में अंतर कर देती है सार्वजनिक क्षेत्र और निजी क्षेत्र के बैंकों के बीच इस अंतर को समझने से  उम्मीदवार दोनों क्षेत्रों की नौकरियो की जिम्मेदारियों और कैरियर डेवलपमेंट के मार्ग का मूल्यांकन स्वयं कर सकते है।

 भर्ती प्रक्रिया

इन दोनों बैंकिंग क्षेत्रों के लिए भर्ती प्रक्रिया काफी अलग-अलग है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक निजी क्षेत्र के बैंकों की तुलना में भर्ती के अधिक अवसर प्रदान करते हैं, क्योंकि वे सरकार द्वारा निर्धारित नियमों और दिशा-निर्देशों का पालन करते हैं। ज्यादातर पब्लिक सेक्टर बैंक ओपन कम्पटीशन परीक्षाओं के माध्यम से भर्ती करते हैं, जिसके लिए समाचार पत्रों, इन्टरनेट आदि में सूचनाएं विज्ञापित की जाती हैं और पात्रता मानदंडों के आधार पर सभी से आवेदन आमंत्रित किए जाते हैं। वे आरक्षित श्रेणी उम्मीदवारों के लिए सरकार द्वारा निर्धारित नियमों के अनुसार कोटा प्रणाली का भी पालन करते हैं।

आम तौर पर, निजी बैंक में भर्ती कैंपस रिक्रूटमेंट, रेफरल, वाल्क-इन इंटरव्यू आदि के माध्यम से की जाती हैं। हालांकि, बढ़ती रिक्तियों के साथ निजी बैंकों ने भी समाचार पत्रों आदि के माध्यम से ओपन कम्पटीशन परीक्षा के माध्यम से भर्ती शुरू कर दी है। इसके अलावा, प्राइवेट बैंक्स आरक्षित श्रेणी उम्मीदवारों के लिए सरकार द्वारा निर्धारित नियमों के अनुसार कोटा प्रणाली का पालन नहीं करते हैं।

 

 

वेतनमान

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक के लिए, वेतनमान और पदोन्नति की पालिसी पहले से ही संगठनात्मक स्तर पर निर्धारित होती है। आम तौर पर, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में क्लर्कों के लिए 11765-655/3-13730-815/3-16175980/4-20095-1145/7-28110-2120/1-30230-1310/1-31540 और प्रवेश स्तर के पदों के लिए पीओ पदों के लिए 23700 - (980 x 7) - 30560 - (1145 x 2) - 32850 - (1310 x 7) – 42020 का वेतनमान है।

दूसरी तरफ, निजी बैंक, वेतनमानों के लिए इस तरह के प्रतिबंध नहीं हैं और वे व्यक्तियों की योग्यता और अनुभव के अनुसार वेतन देते हैं। एक आम धारणा भी है कि निजी क्षेत्र के बैंक MBA जैसे प्रोफेशनल डिग्री वाले लोगों को भर्ती करना पसंद करते हैं।

ट्रेनिंग एंड डेवलपमेंट

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक कर्मचारियों के प्रशिक्षण और विकास अर्थात ट्रेनिंग एंड डेवलपमेंट में बहुत समय और पैसा निवेश करते हैं। इनके प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य फोकस कर्मचारियों एक ऐसी एसेट में बदलना है जो लंबे समय तक बैंक की सेवा करे। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक फ्रेशर्स के लिए सही प्रशिक्षण की जगह हैं।

निजी क्षेत्र के बैंक भी कर्मचारियों के प्रशिक्षण पर ध्यान केंद्रित करते हैं, हालांकि वे सामान्यता ऑन-जॉब ट्रेनिंग प्रदान करते है और उनके वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा नए कर्मचारियों नौकरी की जिम्मेदारियों के विभिन्न पहलुओं में प्रशिक्षित किया जाता है। निजी क्षेत्र के बैंकों का एक और फायदा यह है कि वे अपने उच्च प्रदर्शन वाले कर्मचारियों को शीर्ष प्रबंधन संस्थानों में प्रशिक्षण के लिए भेजते रहते हैं।

कैरियर ग्रोथ

कैरियर ग्रोथ सबसे बड़ा और सबसे महत्वपूर्ण कारक है, जिसके बारे में उम्मीदवारों को बैंकिंग क्षेत्र में शामिल होने से पहले से विचार करना चाहिए।

संरचित संगठन और वरिष्ठता आधारित(seniority based) प्रमोशन पालिसी के कारण, निजी क्षेत्र के बैंकों की तुलना में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में कैरियर ग्रोथ की गति काफी धीमी है। यह कर्मचारियों के उत्साह को प्रभावित करता है, क्योंकि वे पहले से ही जानते हैं कि वे निश्चित वर्षों के बाद ही प्रमोट किया जाएगा। हालांकि बढ़ते कम्पटीशन के कारन कुछ पब्लिक सेक्टर बैंकों ने प्रतिभाशाली कर्मचारियों को रिटेन करने के लिए योग्यता पर आधारित प्रमोशन की शुरुआत की है।

 

दूसरी ओर, निजी क्षेत्र के बैंक किसी कर्मचारी के प्रदर्शन के आधार पर कैरियर विकास के अधिक अवसर प्रदान करते हैं। निजी क्षेत्र के बैंकों में प्रतिभा को अच्छी तरह से पुरस्कृत किया जाता है।

नौकरी की सुरक्षा

नौकरी की सुरक्षा के कारण कई उम्मीदवार सार्वजनिक क्षेत्र की बैंक की नौकरी को चुनते हैं। नौकरी की सुरक्षा एक सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक में आपके पैकेज के हिस्से के रूप में आता है, जहां एक कर्मचारी को नौकरी जिम्मेदारियों को समझने और समायोजित करने के लिए पर्याप्त समय दिया जाता है। कोई बहुत बड़ी गलती करने पर पब्लिक सेक्टर बैंक के कर्मचारी को नौकरी से निकला जा सकता है।

निजी क्षेत्र के बैंक प्रतियोगी व्यापार इकाइयां (competitive business units) हैं और लाभ के लिए काम करती हैं। इसलिए, प्रोफेशनल एटीटूड या नौकरी की ज़िम्मेदारियों में लापरवाही से आप अपनी नौकरी गवा सकते है।

वर्क-कल्चर

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक सरकारी संस्थाए है; इसलिए उन्हें बाज़ार में बहुत प्रतिस्पर्धी (competitive) होने की ज़रूरत नहीं है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक का वर्क-कल्चर रिलैक्स्ड होता है।

दूसरी ओर, निजी क्षेत्र के बैंक लाभ मार्जिन पर काम करते हैं और इसलिए उनके कर्मचारियों को सीमित संसाधनों के साथ हाई टारगेट पूरा करना होता हैं। इन लक्ष्यों को पूरा करने के लिए प्रत्येक कर्मचारी को अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना होता है। जो निजी क्षेत्र के बैंक में वर्क-कल्चर को बहुत आक्रामक बना देता  है।

लाभ और अन्य सुविधाए

जब लाभ और भत्तों की बात आती है, तो निजी क्षेत्र के बैंकों की तुलना में सार्वजनिक क्षेत्र में निश्चित रूप से अधिक ऑफर्स होते है। पब्लिक सेक्टर बैंक के कर्मचारियों को विभिन्न सुविधाए जैसे कर्मचारी पेंशन योजना, कम ब्याज दर पर ऋण, जमा(deposits) पर उच्च ब्याज दर इत्यादि मिलती हैं।

निजी क्षेत्र के बैंक अपने कर्मचारियों को नौकरी पैकेज के हिस्से के रूप में ऐसे किसी भी लाभ या भत्तों की पेशकश नहीं करते हैं, लेकिन प्रतिभाशाली कर्मचारियों को उनके प्रदर्शन के आधार पर समय –समय पर पुरस्कृत करते रहते है।

ट्रान्सफर

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में नौकरी लेने की योजना बना रहे ज्यादातर उम्मीदवारों के लिए शायद ट्रान्सफर सबसे बड़ी बाधा है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक शहरी महानगरों से लेकर दूर-दूर के ग्रामीण इलाको में मौजूद हैं। इसलिए, आवश्यकताओं के आधार पर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक कर्मचारी को किसी भी स्थान पर स्थानांतरित किया जा सकता है। दूसरी तरफ, निजी क्षेत्र के बैंकों में ट्रान्सफर पालिसी तय नहीं होती है और आम तौर पर विशेष शाखा में किसी विशेष भूमिका के लिए काम पर रखे गए कर्मचारी अपने पूरे कार्यकाल के दौरान वही रहते हैं।

अंत में, हम देख सकते हैं कि दोनों सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंकों में नौकरी करने के फायदे और नुकसान हैं। यह उम्मीदवारों पर निर्भर है कि वे किस क्षेत्र में अपना कैरियर कैरियर बनाना चाहते हैं।

Jagran Josh
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Education Desk

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