भारत की अमेरिका और जापान जैसी आधुनिक “ट्रेन T-18” की विशेषताएं

Nov 15, 2018, 11:08 IST

भारतीय रेलवे एशिया का सबसे बड़ा रेल नेटवर्क और विश्व का चौथा सबसे बड़ा रेल नेटवर्क है. लेकिन दुनिया में भारतीय रेलवे को सुस्त स्पीड से दौड़ने और गन्दगी के लिए जाना जाता है. लेकिन अब भारत सरकार रेलवे के इस टैग के बदलने के लिए T-18 ट्रेन चलाने की योजना बना चुका है. जल्दी ही इस ट्रेन का ट्रायल मुंबई अहमदाबाद रेल लाइन पर किया जायेगा.

Train T-18
Train T-18

वर्तमान में भारतीय रेल परिवहन का एक बहुत ही महत्वपूर्ण साधन बन गया है. आकंड़ों के अनुसार; भारत सरकार द्वारा संचालित भारतीय रेलवे एशिया का सबसे बड़ा रेल नेटवर्क और विश्व का चौथा सबसे बड़ा रेल नेटवर्क है. भारत में रेलवे पटरी 92,081 किलोमीटर में फैली हुई है जो 66,687 किलोमीटर की दूरी को कवर करती है. भारत में डेली 13 हजार यात्री ट्रेंने चलतीं है जिनमें औसतन 2.5 करोड़ लोग रोज यात्रा करते हैं.

आपने अक्सर लोगों को यह कहते हुए सुना होगा कि भारत की रेल बहुत गन्दी रहती है और विश्व के अन्य देशों की तुलना में भारत की ट्रेनों की गति भी बहुत कम होती है. लेकिन ऐसी आलोचना करने वाले लोगों के लिए भारत सरकार; मेक इन इंडिया स्कीम के तहत एक विशेष ट्रेन शुरू करने जा रही है जिसका नाम है ट्रेन-18.  इस खास ट्रेन की घोषणा इसी साल के बजट में की गयी थी. सरकार की योजना भविष्य में शताब्दी जैसी ट्रेनों को हटाकर T-18 ट्रेनें चलाने की है.

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सब अर्बन ट्रेनों, जिन्हें आमतौर पर लोकल, EMU या मेट्रो भी कहा जाता है, की तरह इस ट्रेन के दोनों छोर पर मोटर कोच होंगे. आसान शब्दों में कहें तो यह ट्रेन दोनों दिशाओं में चल सकेगी

इस लेख में हम इसी ट्रेन-18 ट्रेन की खूबियों के बारे में बात करेंगे. आइये इस ट्रेन की विशेषताओं के बारे में निम्न बिन्दुओं के माध्यम से जानते हैं;

1. भारत में “मेक इन इंडिया” के तहत तैयार होने वाली इस ट्रेन का निर्माण अमेरिका, जापान, चीन और स्विट्जरलैंड की तर्ज पर किया जा रहा है. इस ट्रेन में कुल 16 कोच होंगे. इसमें भी शताब्दी एक्सप्रेस की तर्ज पर चेयर कार में 74 और एक्जीक्यूटिव कार में 54 सीटें होंगी. यह ट्रेन पूरी तरह से अंतर्राष्ट्रीय मानकों पर खरी उतरने वाली ट्रेन होगी.

2. ट्रेन-18 पूरी तरह से चेयरकार वाली ट्रेन होगी, जिसे भारतीय रेल की चेन्नई स्थित आईसीएफ (इंटीग्रल कोच फैक्ट्री) द्वारा तैयार किया जा रहा है. रेलवे के अधिकारियों ने ट्रेन-18 टाइप की पहली ट्रेन का जुलाई में ट्रायल रन करने की योजना बनाई थी, लेकिन इसमें देरी हो गयी है और अब इसका ट्रायल सितम्बर माह में शुरू हो जाने की संभावना है.

3. T -18 की टॉप स्पीड 180  किमी प्रति घंटा होगी.  इसी स्पीड पर इसका ट्रायल मुंबई-अहमदाबाद रूट पर इसका ट्रायल शुरू हो सकता है. ज्ञातव्य है कि इसी रूट पर गतिमान एक्सप्रेस ट्रेन भी चलती है.

4. इस ट्रेन के बारे में सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि इस ट्रेन में इंजन नहीं लगा होगा. इस ट्रेन में इंजन की जगह ड्राइवर केबिन व हर चौथे कोच में ऐसी मोटर व तकनीक होगी जो इंजन की तरह ही ट्रेन को रफ्तार देगी.

5. अभी ट्रेन-18 के 2 दर्जन कोच के निर्माण पर 120 करोड़ का खर्च आया है. इसके एक कोच पर करीबन 6 से 7 करोड़ की लागत आएगी. जबकि पारम्परिक एलएचबी कोच की लागत 3 करोड़ के लगभग होती थी. लेकिन पुरानी ट्रेन में लगने वाले इंजन की कीमत 12 से 15 करोड़ रुपए होती है.

Train t 18 pics

6. एक और चौकाने वाली इस ट्रेन की यह होगी कि इस ट्रेन में झटकों को कम करने की तकनीक लगी हुई है और ब्रेक लगते ही बिजली उत्पादन की तकनीकी ब्रेक से 30 से 35 प्रतिशत बिजली का उत्पादन करेगी.

7. भारतीय रेलवे इस ट्रेन के कोच में स्टेनलेस स्टील का उपयोग कर रही है. इसका वजन यात्रियों व सामान सहित 55 टन होगा.

8. परम्परागत ट्रेनों के विपरीत यह ट्रेन सभी दिव्यांग की सहूलियत के हिसाब से डिज़ाइन की गयी है. दिव्यांग व्यक्ति सभी कोचों में व्हील चेयर के साथ जा सकेगे, शौचालय में भी दिव्यांग व्हील चेयर के साथ जा सकेंगे. ट्रेन के हर कोच में दिव्यांग व्यक्तियों के लिए एक सीट होगी.

Train t 18 toilet pics

रेलवे को उम्मीद है कि यह ट्रेन दुनिया में भारतीय रेलवे की ब्रांड इमेज को बदलने में कामयाब होगी. फस्र्ट क्लास के कोच में जिस दिशा में ट्रेन चलेगी उसी दिशा में कुर्सियां दिशा बदल लेगी. यह ट्रेन पूरी तरह से वातानुकूलित होगी और सभी कोच एक दूसरे से कनेक्टेड होंगे.

t 18 train coach pics

ऑटोमेटिक दरवाजे के साथ जैसे ही ट्रेन रुकेगी प्लेटफार्म और कोच के स्टेप स्लाइडिंग निकलेगा जिसकी मदद से यात्री चढ़ व उतर सकेंगे.

यहाँ पर यह बताना जरूरी है कि भारत इसी तरह की एक और ट्रेन T-20 के नाम से भी बना रहा है. ट्रेन- 20 का लुक जहां ट्रेन- 18 जैसा ही होगा तो बाहरी व अंदरूनी फीचर और भी बेहतर होंगे. ट्रेन- 20 का नाम इसलिए ट्रेन रखा गया है, क्योंकि रेलवे इसे 2020 तक पटरी पर उतार देगा.

नोट: भारतीय रेल की महत्वाकांक्षी टी-18 ट्रेन अपने पहले ही ट्रायल में फेल हो गई है. इसका परिक्षण चेन्नई मंडल के अन्नानगर के पास ट्रेन के ट्रायल के दौरान 4 और 5 नवंबर को हुआ था. चेन्नई के जिस इंटीग्रल कोच फैक्ट्री के इलेक्ट्रिक ट्रैक पर टी-18 का ट्रायल चल रहा था वहां हाई वोल्टेज के कारण ट्रेन के कई पुर्जे जलकर ख़ाक हो गए थे.

ट्रायल में फ़ैल होने के बाद भी इस बात की उम्मीद की जाती है कि यह ट्रेन भारतीय रेलवे के इतिहास में मील का पत्थर साबित होगी और लोगों के दिमाग में बसी गन्दी और सुस्त भारतीय रेल की छबि दूर करने में सफल होगी.

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Hemant Singh is an academic writer with 7+ years of experience in research, teaching and content creation for competitive exams. He is a postgraduate in International
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