UP Board कक्षा 10 विज्ञान के 23rd chapter आनुवंशिकता के सिद्धांत (principles of heredity) के first पार्ट का स्टडी नोट्स यहाँ उपलब्ध है| हम इस चैप्टर नोट्स में जिन टॉपिक्स को कवर कर रहें हैं उसे काफी सरल तरीके से समझाने की कोशिश की गई है और जहाँ भी उदाहरण की आवश्यकता है वहाँ उदहारण के साथ टॉपिक को परिभाषित किया गया है| इस लेख में हम जिन टॉपिक को कवर कर रहे हैं वह यहाँ अंकित हैं:
मेंडेल के आनुवांशिक के नियम (Mendel’s Law of Inheritance) :
मेंडेल ने प्रयोगों के आधार पर निम्नलिखित तीन नियमों का प्रतिपादन किया| इन नियमनों को मेंडेल के आनुवांशिक के नियम (mendel’s Law of Inheritance) के नाम से जाना जाता है|
1. प्रभावित का नियम (Law of Dominance),
2. पृथक्करण या युग्मकों की शुद्धता का नियम (Law of Segregation or Purity of gametes),
3. स्वतन्त्र अप्व्युह्न का नियम या आनुवांशिक एककों का स्वतन्त्र प्रदर्शन का नियम (Law of Independent Assortment)|
1. प्रभाविता का नियम (Law of Dominance) : इस नियम के अनुसार जीन के जोडे में से प्रभावी (dominant) जीन अप्रभावी (recessive) जीन को प्रदर्शित नहीं होने देता अर्थात्-
जब परस्पर विरोधी लक्षण वाले पौधों के बीच संकरण (cross) कराया जाता है तो उनकी सन्तानों में विरोधी लक्षणों में से एक प्रभावी (dominant) लक्षण प्रर्दशित होता है तथा दूसरा अप्रभावी (recessive) लक्षण प्रदर्शित नहीं होता है। इसे प्रभाविता का नियम कहते। मेंडेल ने यह नियम एकसंकर क्रॉस के प्रयोग के पश्चात् प्रतिपादित किया।
उदाहरण-
प्रयोग 1 - ज़ब शुद्ध लम्बे तथा शुद्ध बौने पौधों के बीच संकरण (cross) कराया जाता है को प्रथम पीढी (F1) में प्राप्त सभी पौधे लम्बे होते है, क्योकि लम्बेपन का गुण प्रभावी तथा बौनेपन का गुण अप्रभावी होता है।
प्रयोग 2- ज़ब शुद्ध बैगनी एवं शुद्ध सफेद पुष्प वाले मटर के पौधों के बीच संकरण (cross) कराया जाता है तो प्रथम पीढी के सभी पौधे बैगनी पुष्प वाले होते हैं। इससे स्पष्ट है कि पुष्पों में बैगनी रंग प्रभावी तथा सफेद रंग अप्रभावी होता है।
जीन (Gene) :
'जीन' शब्द का प्रयोग जोहनसन (Johansson) ने 1909 ईं० में किया था । गुणसूत्रों (chromosomes) की संख्या प्रत्येक जाति में निश्चित होती है। गुणसूत्र का निर्माण मुख्यत:
डिआक्सीराइबोन्यूक्लिक अम्ल (deoxyribonucleic acid = DNA) के द्वारा होता है। यही पदार्थ आनुवंशिक पदार्थ है, जो संरचना में अत्यन्त जटिल तथा सीढी की तरह के दो कुण्डलों (helices) के द्वारा निर्मित होता है। DNA अणुओं के सूक्ष्म ख़ण्डो को ही जीन (gene) कहा जाता है जो आनुवंशिकी लक्षणों की इकाई (units of hereditary characters) की तरह कार्य करते हैं। इस प्रकार प्रत्येक गुणसूत्र पर सैकडों जिन्स हो सकते है तथा एक जीव की कोशिका में, सहस्त्रों जीन्स होते है।
परिभाषा के रूप में - "जीन्स (genes) वे जटिल (DNA) अणु है जो विभिन्न क्रियात्मक एवं रासायनिक परिवर्तन करने में सफल होते है और इसी कारण विभिन्न लक्षणों को प्रदर्शित करते हैं। आधुनिक रूप में, यह स्पष्ट है कि जीन्स (मेणडेल के कारक) इकाई के रूप में व्यवहार करते हैं। सामान्यतया एक जीन एक लक्षण का नियन्त्रण एवं नियमन करता है। कुछ लक्षणों का निर्धारण अनेक जीन मिलकर करते हैं। कभी - कभी कोई जीन अनेक लक्षणों को प्रभावित करता है।
जब दो तुलनात्मक आनुवांशिक लक्षणों को ध्यान में रखकर संकरण कराया जाता है तो इसे द्विसंकर संकरण (dihybrid cross) कहते हैं| F1 पीढ़ी में प्रभाविता के नियमानुसार प्रभावी लक्ष्ण प्रदर्शित होते हैं| युग्मक निर्माण के समय तुलनात्मक लक्षणों के जीनस पृथक होकर युग्मकों में पहुँचते हैं| F1 पीढ़ी के युग्मक परस्पर मिलकर F2 पीढ़ी में 9 : 3 : 3 : 1 के अनुपात में फीनोटाइप (phenotype) बनते हैं| F2 पीढ़ी में नए – नए संयोग बनते हैं|
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